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अनोखी पहल: शिमला के ढली बाजार में प्लास्टिक मुक्त अभियान के तहत कपड़े के थैलों का हुआ निःशुल्क वितरण

शिमला जिले के ऐतिहासिक ढली बाजार में आज पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नया कदम उठाते हुए दुकानदारों और ग्राहकों के बीच कपड़े के थैलों का निःशुल्क वितरण किया गया। स्थानीय व्यापार मंडल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सिंगल-यूज प्लास्टिक के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना और लोगों को इको-फ्रेंडली विकल्पों के प्रति जागरूक करना है।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 17:28
अनोखी पहल: शिमला के ढली बाजार में प्लास्टिक मुक्त अभियान के तहत कपड़े के थैलों का हुआ निःशुल्क वितरण
पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए शिमला के व्यस्त ढली बाजार में आज एक अनूठा जागरूकता अभियान चलाया गया। स्थानीय व्यापार मंडल और युवा स्वयंसेवकों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों द्वारा किया गया। इस अभियान के तहत बाजार आने वाले प्रत्येक ग्राहक को पॉलीथीन का उपयोग बंद करने की अपील के साथ टिकाऊ कपड़े के थैले भेंट किए गए। दुकानदारों ने भी एक स्वर में संकल्प लिया कि वे अपनी दुकानों पर आने वाले ग्राहकों को अब किसी भी स्थिति में प्लास्टिक की थैलियां नहीं देंगे, बल्कि वैकल्पिक रूप से जूट और सूती थैलों का ही प्रयोग करेंगे।

युवा स्वयंसेवकों ने संभाली जागरूकता की कमान

इस विशेष अभियान के दौरान स्थानीय महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बाजार की हर एक दुकान पर जाकर दुकानदारों और खरीदारों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने नुक्कड़ नाटकों और नारों के माध्यम से यह समझाया कि कैसे प्लास्टिक हमारे पहाड़ों के पारिस्थितिकी तंत्र और जल स्रोतों को गंभीर नुकसान पहुँचा रहा है। बाजार समिति के अध्यक्ष ने बताया कि यह केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसे एक सतत प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा ताकि ढली बाजार को जिले का पहला पूरी तरह से प्लास्टिक-मुक्त व्यावसायिक केंद्र बनाया जा सके। इसके लिए एक निगरानी दल का भी गठन किया गया है जो नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखेगा।

व्यापारियों और ग्राहकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया

स्थानीय खरीदारों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जब तक समाज का हर वर्ग मिलकर आगे नहीं आएगा, तब तक पर्यावरण को बचाना संभव नहीं है। कई दुकानदारों ने अपने स्तर पर ग्राहकों के लिए मामूली कीमत पर कपड़े के थैले उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी शुरू कर दी है। नगर प्रशासन ने भी व्यापार मंडल के इस प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की है और अन्य बाजारों को भी इस मॉडल से प्रेरणा लेने की सलाह दी है। इस प्रकार के छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े बदलाव की नींव रखते हैं और शिमला जैसे संवेदनशील पर्यटन स्थल के लिए यह पहल एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
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