जिलाधिकारी के जनता दर्शन में पहुंची बुजुर्ग की पीड़ा
बाराबंकी में जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह द्वारा आयोजित जनता दर्शन के दौरान एक भावुक दृश्य देखने को मिला जहां 73 वर्षीय बाबूलाल नाम के एक बुजुर्ग अपनी समस्या लेकर पहुंचे। बाबूलाल ने जिलाधिकारी को बताया कि उनके परिवार में तीन बेटियां और एक बेटा है लेकिन वर्तमान में उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि उनके बेटे ने उन्हें अपने घर से बाहर निकाल दिया है जिसके कारण उन्हें घर-परिवार से दूर अकेले रहने के लिए विवश होना पड़ रहा है। बाबूलाल की तीनों बेटियां भी अपने-अपने वैवाहिक घरों में रह रही हैं। इस स्थिति के चलते बुजुर्ग को अपना जीवन यापन करने के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिलाधिकारी ने बाबूलाल की बातों को अत्यंत गंभीरता से सुना और उनकी समस्याओं के हर पहलू को समझने का प्रयास किया ताकि उन्हें तत्काल राहत पहुंचाई जा सके।
पेंशन के लिए अधिकारियों को दिए गए निर्देश
बाबूलाल की व्यथा सुनने के बाद जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने तत्काल प्रभाव से समाज कल्याण अधिकारी को अपने कार्यालय में तलब किया। बुजुर्ग ने बताया कि उनके पास जीविकोपार्जन का कोई आर्थिक स्रोत नहीं बचा है और उनकी वृद्धावस्था पेंशन भी अभी तक नहीं बन पाई है। इस पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने समाज कल्याण विभाग के संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि बाबूलाल की पेंशन प्रक्रिया को बिना किसी देरी के पूरा किया जाए। उन्होंने अधिकारी को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि बुजुर्ग को सरकारी योजना का लाभ समय पर मिल सके ताकि उन्हें किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक तंत्र का मुख्य उद्देश्य पात्र व्यक्तियों तक सरकारी लाभ पहुंचाना है। इस दौरान उन्होंने बाबूलाल को पूरी सहायता का भरोसा दिया ताकि उन्हें भविष्य में किसी भी प्रकार की आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।
सरकारी योजनाओं से बुजुर्ग को मिलेगा संबल
जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह की इस त्वरित पहल ने बाबूलाल जैसे लाचार बुजुर्गों के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाया है। अक्सर देखा जाता है कि वृद्धजन अपने परिवार में ही उपेक्षा का शिकार होकर दर-दर भटकने को मजबूर होते हैं। बाबूलाल का मामला इसी सामाजिक संवेदनशीलता की कड़ी का एक हिस्सा है जिसे जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने से बाबूलाल को एक बड़ा आर्थिक संबल प्राप्त होगा जो उनके अकेलेपन और बुढ़ापे की कठिन परिस्थितियों में सहारा बनेगा। जिले के आला अधिकारियों का यह रुख आम जनता में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति भरोसा कायम रखने का काम करता है। अब जब जिलाधिकारी ने स्वयं समाज कल्याण विभाग को कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं तो उम्मीद है कि बाबूलाल की पेंशन जल्द ही स्वीकृत हो जाएगी। यह कदम अन्य निराश्रित बुजुर्गों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हो सकता है जो सहायता के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटते हैं।