बांसा चौराहे पर हैंडपंप की खराबी
बाराबंकी जिले के अंतर्गत आने वाले बांसा गांव के मुख्य चौराहे पर स्थापित सरकारी हैंडपंप काफी समय से बेकार पड़ा हुआ है। इस हैंडपंप से सामान्य रूप से पानी की एक बूंद भी नहीं निकल पा रही है, जिसके चलते स्थानीय निवासियों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। चौराहे पर स्थित दुकानदारों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पानी जुटाने में घंटों का संघर्ष करना पड़ता है। कई बार हैंडपंप को लगातार कई घंटों तक चलाने के बाद ही नाममात्र का पानी बाहर आता है, जो लोगों की आवश्यकताओं के लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। यह स्थान पूरे गांव का मुख्य केंद्र है, जहां पर भारी संख्या में दुकानें स्थित हैं और दिन भर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। पानी न मिलने की समस्या से दुकानदारों के साथ-साथ राहगीरों और आसपास से गुजरने वाले आम लोगों को भी काफी परेशानी हो रही है और वे इस भीषण गर्मी या सामान्य दिनों में भी बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हो गए हैं।
खराब व्यवस्था और ग्रामीणों की मांग
हैंडपंप की बदहाली के साथ-साथ चौराहे पर फैली गंदगी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। नल के ठीक आसपास भारी मात्रा में गंदा पानी जमा रहता है, जिससे हर समय संक्रमण और मच्छरों के पनपने का खतरा बना हुआ है। इलाके की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है, जिस पर संबंधित विभाग का कोई ध्यान नहीं है। इस विकट स्थिति को देखते हुए बांसा के ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाते हुए ग्राम पंचायत और संबंधित विभागीय अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को तुरंत इस हैंडपंप का बारीकी से निरीक्षण करना चाहिए ताकि खराबी के असल कारणों का पता लग सके। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि हैंडपंप की त्वरित मरम्मत होनी चाहिए ताकि आम जनमानस को राहत मिल सके। इसके अतिरिक्त, चौराहे पर जमा गंदे पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करने और पूरे क्षेत्र में नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने की भी मांग प्रमुखता से उठाई गई है ताकि क्षेत्र को बीमारियों से मुक्त रखा जा सके।
मरम्मत की जरूरत और जनहित का मुद्दा
सरकारी हैंडपंप का खराब होना केवल एक तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि यह बांसा गांव के निवासियों के मौलिक अधिकार से जुड़ा मुद्दा बन गया है। इस चौराहे पर हर समय भीड़ रहती है, लेकिन मूलभूत सुविधा के अभाव में लोग अत्यधिक त्रस्त हैं। ग्रामीणों को खुद ही नल ठीक करने या पानी की व्यवस्था करने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है, जो प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम न उठाए जाने से निवासियों में काफी आक्रोश व्याप्त है। पानी की निकासी न होने के कारण वहां कीचड़ और गंदगी का अंबार लग गया है, जो किसी भी समय महामारी को न्योता दे सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि वे इसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराएं ताकि आम जनता को शुद्ध पेयजल सुलभ हो सके। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो पानी की किल्लत और गंदगी के कारण क्षेत्र में बीमारियां फैल सकती हैं, जिसके लिए सीधे तौर पर स्थानीय विभाग के अधिकारी ही जिम्मेदार होंगे। सभी ग्रामीण अभी भी सरकारी मदद की राह देख रहे हैं।