पुलिस महकमे में फेरबदल और नई जिम्मेदारी
राजधानी लखनऊ में शिवा शर्मा हत्याकांड की जांच को तेज करने के लिए पुलिस विभाग में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया गया है। वारदात के 10 दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे पुलिस की पकड़ से दूर बनी हुई है और उसकी लगातार अनुपस्थिति से पुलिस अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस बीच आरोपी महिला द्वारा वीडियो के माध्यम से बयान जारी करने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया और तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर को उनके पद से हटाकर सीधे पुलिस महानिदेशक मुख्यालय से अटैच कर दिया गया। इसके तुरंत बाद आईपीएस अधिकारी अर्पित विजयवर्गीय को लखनऊ के नए डीसीपी सेंट्रल के रूप में तैनात किया गया है। नए पुलिस अधिकारी के कंधों पर सेंट्रल क्षेत्र की कानून व्यवस्था के साथ-साथ महत्वपूर्ण सुरक्षा और खुफिया तंत्र की कमान भी सौंपी गई है। अब इस चर्चित हत्याकांड की पूरी जांच का नेतृत्व नए डीसीपी अर्पित विजयवर्गीय के मार्गदर्शन में ही आगे बढ़ाया जाएगा।
फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए विशेष टीमें
इस सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने अपनी गतिविधियों को काफी तेज कर दिया है। लखनऊ के प्रमुख कारोबारी शिवा शर्मा के कत्ल के प्रकरण में मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे के अलावा उसकी सगी बहन रश्मि दुबे और एक अन्य सहयोगी ड्राइवर दानिश की संलिप्तता सामने आई थी। इन सभी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उत्तर प्रदेश की विशेष कार्य बल यानी एसटीएफ को भी मैदान में उतार दिया गया है। पुलिस प्रशासन ने फरार चल रही मुख्य आरोपी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा है ताकि सूचना मिलने पर उसकी जल्द से जल्द दस्तयाब हो सके। हालांकि लगातार पुलिस दबिश के बावजूद ये सभी आरोपी अभी तक कानून के शिकंजे से बाहर हैं और पुलिस के हाथ खाली बने हुए हैं। इसी नाकामी के चलते पूर्व जांच अधिकारी और हजरतगंज थाने के एसएचओ विक्रम सिंह को भी लाइन हाजिर करने की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। कानूनी शिकंजे से बचने के लिए इनामी मॉडल श्रद्धा दुबे लगातार सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अपने वीडियो संदेश जारी कर रही है जिससे पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में बनी हुई है और अधिकारी हरसंभव प्रयास में जुटे हैं।
नये डीसीपी का शैक्षिक और पेशेवर सफर
लखनऊ में शांति व्यवस्था संभालने के लिए लाए गए नए डीसीपी अर्पित विजयवर्गीय मूल रूप से राजस्थान के कोटा शहर के रहने वाले हैं। अपनी वर्तमान तैनाती मिलने से पहले वे बाराबंकी जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने देश के जाने-माने संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग विषय में अपनी उच्च तकनीकी शिक्षा पूरी की थी। प्रतिष्ठित तकनीकी शिक्षण संस्थान से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपनी योग्यता के दम पर एक बैंक में आठ लाख रुपये के वार्षिक पैकेज पर नौकरी भी की थी। लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य देश की सिविल सेवा परीक्षा को पास करके प्रशासनिक सेवा में जाना था जिसके चलते उन्होंने बैंक की वह नौकरी छोड़ दी। अपने शुरुआती प्रयासों में असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और चौथे प्रयास में आखिरकार सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। वे वर्ष 2017 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के भारतीय पुलिस सेवा के मेधावी अधिकारी हैं जिनकी कार्यशैली बेहद सख्त मानी जाती है। अपनी उत्कृष्ट और सराहनीय सेवाओं के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक द्वारा प्रतिष्ठित डीजी कमेंडेशन डिस्क सिल्वर सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उन्हें यह सम्मान 15 अगस्त 2024 और उसके बाद 26 जनवरी 2026 को उत्कृष्ट पुलिसिंग के लिए प्रदान किया गया था।