एम्बुलेंस का व्यावसायिक इस्तेमाल सामने आया मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में आपातकालीन चिकित्सा सेवा के लिए तैनात सरकारी 108 एंबुलेंस के दुरुपयोग का एक चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। आपातकाल की स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुँचाने के लिए उपयोग में लाई जाने वाली इस जीवनरक्षक गाड़ी का इस्तेमाल घरेलू या व्यावसायिक सामान ढोने के लिए किया जा रहा था। सामने आए एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि इस चिकित्सा वाहन के अंदर मरीजों के स्ट्रेचर और प्राथमिक चिकित्सा उपकरणों के स्थान पर सब्जियां भरी हुई थीं। इस प्रकार की गंभीर लापरवाही न केवल विभागीय नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि उन जरूरतमंद मरीजों के साथ भी अन्याय है जिन्हें समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ सकती है। इस वीडियो के इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित होने के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है और लोग इस बात की कड़ी निंदा कर रहे हैं कि किस प्रकार सरकारी संसाधनों का निजी या व्यावसायिक स्वार्थों के लिए खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल इस प्रकार की घटनाएं देश भर की उन आपातकालीन स्वास्थ्य प्रणालियों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं जिनका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गरीब व लाचार मरीजों को त्वरित चिकित्सा सहायता प्रदान करना होता है। सरकार द्वारा संचालित 108 एंबुलेंस सेवा के संचालन के लिए निजी या अनुबंधित एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी जाती है, जिनकी यह नैतिक और कानूनी बाध्यता होती है कि वाहनों का उपयोग केवल चिकित्सकीय कार्यों के लिए ही किया जाए। इसके बावजूद मैदानी स्तर पर उचित मॉनिटरिंग और प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के कारण इस तरह की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं जहाँ चालक या संबंधित कर्मचारी अपने निजी लाभ के लिए इन वाहनों का गलत इस्तेमाल करते हैं। नर्मदापुरम की यह घटना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक नियंत्रण कितना कमजोर हो चुका है और किस प्रकार जवाबदेही तय करने वाले अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं। जब तक इस तरह के मामलों में सख्त से सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक सरकारी योजनाओं के धरातल पर सुधार की उम्मीद करना बेमानी साबित होगा।
जांच के बाद अधिकारियों की प्रतिक्रिया वायरल वीडियो के तूल पकड़ने और मीडिया में मामला उछलने के बाद अब जिला स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटी है और उन्होंने पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने का आश्वासन दिया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता की पूरी तरह से पड़ताल की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि यह एंबुलेंस किस क्षेत्र की है और उस समय इसका संचालन कौन कर रहा था। शुरुआती जानकारियों के आधार पर संबंधित वाहन के चालकों तथा इससे जुड़े अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच की जा रही है ताकि दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जा सके। इस बीच, आम जनता और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि केवल खानापूर्ति के लिए औपचारिकता निभाने के बजाय दोषियों को तुरंत सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की अमानवीय और गैर-जिम्मेदाराना हरकतें करने की कोई हिम्मत न जुटा सके। प्रशासन की इस आगामी कार्रवाई पर अब पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं कि वे इस मामले में कितनी पारदर्शिता और सख्ती दिखाते हैं।