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बस्ती में प्रदर्शन: यूजीसी के खिलाफ 48 दिनों से जारी है मेधा पार्टी का धरना

बस्ती जिले में मेधा पार्टी द्वारा शिक्षा प्रणाली में बदलाव और यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है। गांधी कला भवन परिसर में जारी इस धरने के 48 दिन पूरे हो गए हैं।

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Ankit Yadav
12 अक्ट 2026, 10:40
बस्ती में प्रदर्शन: यूजीसी के खिलाफ 48 दिनों से जारी है मेधा पार्टी का धरना

गांधी प्रतिमा के पास लंबे समय से प्रदर्शन

बस्ती जिले में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के नए कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर मेधा पार्टी का धरना लगातार जारी है। गांधी कला भवन परिसर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के समीप आंदोलनकारी पिछले अड़तालीस दिनों से अपनी मांगों के समर्थन में डटे हुए हैं। यह अनिश्चितकालीन धरना अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे तब तक अपना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे जब तक उनकी सभी मांगे केंद्र सरकार द्वारा पूरी नहीं कर ली जाती हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व मेधा पार्टी से जुड़े पदाधिकारी कर रहे हैं और प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग वहां एकत्र हो रहे हैं। धरने के दौरान क्षेत्र के विकास और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए भी आवाज उठाई जा रही है। मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि वे अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं। सरकार की ओर से अभी तक इस लंबी अवधि के आंदोलन को लेकर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पितृ पक्ष में श्रद्धांजलि और आगे की रणनीति

धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों ने पितृ पक्ष के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। आंदोलन के दौरान अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए प्राण गंवाने वाले ज्ञात और अज्ञात शहीदों को कार्यकर्ताओं ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पितरों को विदाई देने के उद्देश्य से पारंपरिक रूप से चूरा और दही खिलाकर उन्हें याद किया गया। इस कार्यक्रम में मेधा पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता दीन दयाल त्रिपाठी ने सरकार की उपेक्षा पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अड़तालीस दिनों तक शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने के बावजूद केंद्र सरकार ने अभी तक इस मामले में कोई ठोस बातचीत शुरू नहीं की है। धरने में शामिल होने वालों में उमेश पाण्डेय, विशाल सिंह, दीपक शुक्ला और बृजेश द्विवेदी सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे। अजय चौधरी सहित पार्टी के कई अन्य पदाधिकारी भी अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि वे सरकार की चुप्पी से हताश नहीं हैं और अपनी मांगों को लेकर संघर्ष को अनवरत जारी रखेंगे। उनका संकल्प है कि जब तक परिणाम सकारात्मक नहीं मिलते, तब तक यह प्रदर्शन गांधी प्रतिमा के नीचे निरंतर चलता रहेगा।

सात सूत्री मांगों पर सरकार से जवाब का इंतजार

मेधा पार्टी का यह आंदोलन मुख्य रूप से शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नए बदलावों के विरोध में खड़ा किया गया है। सात सूत्री मांगों के एजेंडे में यूजीसी द्वारा लागू किए गए हालिया नियमों को वापस लेना प्रमुख मुद्दा है। पार्टी का मानना है कि ये कानून न केवल छात्रों बल्कि पूरे शैक्षणिक ढांचे के लिए नुकसानदेह साबित हो रहे हैं। धरने का अड़तालीस दिन तक खिंच जाना प्रशासन और केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब तक सरकार के स्तर से इस मामले को सुलझाने के लिए कोई भी प्रतिनिधिमंडल प्रदर्शनकारियों के पास नहीं भेजा गया है। स्थानीय स्तर पर भी लोग इस प्रदर्शन को लेकर अपनी राय रख रहे हैं और शिक्षा नीति में बदलाव की मांग को जायज बता रहे हैं। आने वाले दिनों में आंदोलनकारी अपनी रणनीति को और अधिक धार देने की योजना बना रहे हैं ताकि शासन तक उनकी आवाज स्पष्ट रूप से पहुँच सके। फिलहाल, गांधी कला भवन परिसर आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र बन गया है जहाँ से सरकार के सामने अपनी सात सूत्री मांगों को रखने का सिलसिला जारी है। यदि सरकार जल्द कोई ठोस पहल नहीं करती है तो आंदोलनकारियों द्वारा और अधिक कड़े कदम उठाए जाने की संभावना है।

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