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भव्य आयोजन: कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय मंथन शुरू

हरियाणा के ऐतिहासिक नगर कुरुक्षेत्र में आगामी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार के महोत्सव को और अधिक भव्य और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच विचार-विमर्श किया जा रहा है।

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Ankit Yadav
28 सित 2026, 16:24
भव्य आयोजन: कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय मंथन शुरू

सैन्य बलों और अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान की सहभागिता ऐतिहासिक नगरी कुरुक्षेत्र में आयोजित होने वाले आगामी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव को इस वर्ष एक बिल्कुल नए और अनूठे स्वरूप में प्रस्तुत करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिसके तहत देश के प्रतिष्ठित रक्षा और वैज्ञानिक संस्थान अपनी विशेष प्रस्तुतियां देंगे। इस भव्य आयोजन के दौरान भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो द्वारा अत्याधुनिक प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी, जो आगंतुकों और विशेषकर युवाओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इन प्रदर्शनियों का मुख्य उद्देश्य देश की सामरिक ताकत, तकनीकी उन्नति और अंतरिक्ष क्षेत्र में हासिल की गई अभूतपूर्व सफलताओं से आम जनता को अवगत कराना है, जिससे सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान का एक अनूठा संगम देखने को मिलेगा। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न विभागों के समन्वयकों ने इस संबंध में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की है, जिसमें इन प्रदर्शनियों के लेआउट, सुरक्षा व्यवस्था और आगंतुकों के सुगम आवागमन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई है ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का वैश्विक मंच पर प्रदर्शन कुरुक्षेत्र की पावन भूमि को भगवद्गीता के उद्गम स्थल के रूप में विश्व भर में विशेष मान्यता प्राप्त है और यहां हर वर्ष आयोजित होने वाला यह महोत्सव भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख प्रतीक बन चुका है। इस आयोजन के माध्यम से न केवल देश के विभिन्न कोनों से आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित किया जाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति के संदेश को प्रसारित करने का एक बड़ा मंच भी प्रदान किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में इस महोत्सव के दायरे और स्वरूप में लगातार विस्तार देखा गया है, जिसमें विभिन्न राज्यों के पारंपरिक शिल्पकला, लोक नृत्य, संगीतमय प्रस्तुतियां और धार्मिक ग्रंथ प्रदर्शनियां शामिल होती रही हैं। इस बार रक्षा बलों और अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की भागीदारी से इस आयोजन का स्तर और अधिक ऊंचा उठने की उम्मीद है, क्योंकि इससे आधुनिक विज्ञान और प्राचीन आध्यात्मिकता के बीच एक सुंदर समन्वय स्थापित होता है। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, हस्तशिल्प उद्योग और रोजगार के नए अवसरों को भी एक मजबूत गति प्राप्त होती है, जिससे पूरे क्षेत्र के विकास में सकारात्मक योगदान मिलता है।

भव्य सफलता के लिए पुख्ता सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां महोत्सव की विशालता को देखते हुए जिला प्रशासन और आयोजन समिति द्वारा सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन और आगंतुकों की बुनियादी सुविधाओं के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। भारी संख्या में आने वाले पर्यटकों और विशिष्ट अतिथियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए खुफिया एजेंसियों और स्थानीय पुलिस बल के साथ मिलकर चाक-चौबंद सुरक्षा घेरा बनाया जाएगा, जिसमें आधुनिक निगरानी उपकरणों का भी भरपूर उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, विभिन्न प्रदर्शनियों स्थलों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष मार्ग बनाए जा रहे हैं ताकि आपातकालीन स्थितियों में भी आवागमन सुचारू रूप से चलता रहे। आने वाले दिनों में और अधिक समितियों का गठन किया जाएगा जो सांस्कृतिक कार्यक्रमों, दीपोत्सव, संगोष्ठियों और अन्य प्रमुख आकर्षणों की देखरेख करेंगी। प्रशासन का यह प्रयास है कि इस बार का महोत्सव न केवल रिकॉर्ड संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करे, बल्कि अपनी उत्कृष्ट व्यवस्था और भव्यता के कारण एक नया मानक भी स्थापित करे, जिससे देश-विदेश में कुरुक्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को और अधिक मजबूती मिल सके।

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