आयोग के सदस्य को हुआ भ्रातृ शोक झारखंड आंदोलनकारी चिन्हितीकरण आयोग के सम्मानित सदस्य के परिवार में हाल ही में एक अत्यंत दुखद घटना घटी है, जिसमें उनके भाई का निधन हो गया है। इस अप्रत्याशित क्षति के कारण उनके पूरे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है और सगे-संबंधियों के बीच भी मायूसी छा गई है। इस कठिन घड़ी में परिवार को सांत्वना देने के लिए कई परिचित और शुभचिंतक उनके आवास पर लगातार पहुंच रहे हैं। भारतीय संस्कृति और सामाजिक परंपराओं के अनुसार ऐसे मौकों पर लोग पीड़ित परिवार के साथ खड़े होकर अपनी एकजुटता और संवेदना का प्रदर्शन करते हैं, ताकि शोक संतप्त परिवार को इस मानसिक आघात को सहन करने की कुछ शक्ति मिल सके। आयोग से जुड़े अन्य अधिकारियों और कर्मियों ने भी व्यक्तिगत रूप से अपनी संवेदना प्रकट करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है।
आंदोलनकारियों के कल्याण से जुड़ी संस्था झारखंड राज्य के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले और लंबे संघर्ष के बाद अपनी पहचान तलाशने वाले आंदोलनकारियों के लिए यह आयोग एक बेहद महत्वपूर्ण संवैधानिक और प्रशासनिक निकाय के रूप में कार्य करता है। इस तरह के आयोगों में काम करने वाले पदाधिकारी समाज के विभिन्न वर्गों के साथ सीधे तौर पर जुड़े होते हैं और राज्य की सांस्कृतिक व राजनीतिक अस्मिता की रक्षा के लिए निरंतर कार्यरत रहते हैं। जब ऐसे महत्वपूर्ण संस्थानों से जुड़े किसी जिम्मेदार व्यक्ति के घर में कोई व्यक्तिगत त्रासदी आती है, तो उसका असर केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनके पेशेवर और सामाजिक दायरे के लोग भी इस दुख में सहभागी बनते हैं। इस संस्था के माध्यम से राज्यभर के उन तमाम लोगों की पहचान और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है जिन्होंने पृथक राज्य आंदोलन के दौरान अनेकों कठिनाइयों का सामना किया था, और इसी वजह से इस आयोग के सदस्यों का सामाजिक जीवन अत्यधिक व्यस्तता और जनसंपर्क से भरा होता है।
शोक संवेदनाओं का तांता और ढांढस इस दुखद समाचार के फैलते ही झारखंड के राजनीतिक गलियारों, प्रशासनिक हलकों और सामाजिक संगठनों में शोक की भावना फैल गई है। कई प्रमुख नेताओं, जनप्रतिनिधियों और आंदोलनकारियों ने दूरभाष के माध्यम से तथा प्रत्यक्ष रूप से मिलकर आयोग के सदस्य के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की चिर शांति की कामना की है। इस प्रकार की कठिन परिस्थितियों में सामाजिक एकजुटता और आपसी भाईचारा ही व्यक्ति को सबसे बड़ा संबल प्रदान करता है, जो पीड़ित परिवार को इस अपूरणीय क्षति से उबरने की मानसिक शक्ति देता है। आने वाले दिनों में विभिन्न संगठनों द्वारा आधिकारिक रूप से शोक सभाओं का आयोजन किए जाने की भी संभावना है, जहां दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी और उनके परिजनों को इस विपदा की घड़ी में धैर्य रखने की प्रेरणा दी जाएगी।