सकरन ब्लॉक में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के अंतर्गत आने वाले सकरन ब्लॉक में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां के कुटी पुरवा मजरा लखुवाबेहड़ गांव में पिछले पच्चीस दिनों से लगातार बिजली की सप्लाई पूरी तरह से बंद पड़ी हुई है। कुछ समय पहले क्षेत्र में आई तेज आंधी और भारी बारिश के कारण बिजली के कई खंभे पूरी तरह से टूट गए थे। इन टूटे हुए पोलों को समय पर ठीक न किए जाने के कारण पूरे इलाके की विद्युत व्यवस्था धड़ाम हो गई है। गांव के लोगों को इस भयंकर गर्मी और अंधेरे के माहौल में अपना जीवन गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बिजली न आने की वजह से गांव में बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हो गई हैं और लोगों को कई तरह की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों की लापरवाही और ग्रामीणों की परेशानी
बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण गांव के दैनिक जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ा है। गांव के छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से रुक गई है क्योंकि वे रात के समय अंधेरे में अपनी किताबें नहीं पढ़ पा रहे हैं। इसके अलावा आधुनिक युग में सबसे जरूरी माने जाने वाले मोबाइल फोन को चार्ज करने में भी लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। घरों की महिलाओं को अपने दैनिक घरेलू काम-धंधे निपटाने में भारी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या से त्रस्त होकर ग्रामीणों ने पावर हाउस ककरहा तम्बौर के जिम्मेदार अधिकारियों के पास जाकर कई बार अपनी शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, अधिकारियों की ओर से हर बार सिर्फ कोरे आश्वासन ही दिए गए और जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर लंबे समय तक कोई भी ध्यान नहीं दिया जिससे जनता में आक्रोश बढ़ता गया।
लाइनमैन का बयान और आंदोलन की चेतावनी
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद बिजली विभाग के लाइनमैन आशीष कुमार ने मीडिया को स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाग की तरफ से टूटे हुए बिजली के खंभों को ठीक करने का काम तेजी से किया जा रहा है और आज शाम तक बिजली चालू कर दी जाएगी। दूसरी ओर, अधिकारियों के टालमटोल रवैये से गुस्से में आए ग्रामीणों ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। गांव के लोगों ने सीधे तौर पर जिलाधिकारी के पास पहुंचकर जल्द से जल्द बिजली बहाल कराने की पुरजोर मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी इस समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इस चेतावनी के बाद स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारियों पर काम जल्दी पूरा करने का भारी दबाव बन गया है।