प्रतियोगिता में शीर्ष पर रहे होनहार विद्यार्थियों के बीच आयोजित की गई इस बेहद लोकप्रिय और ज्ञानवर्धक प्रतियोगिता में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के बच्चों ने पूरी ऊर्जा के साथ हिस्सा लिया था। कड़े मुकाबले और कई चरणों की बौद्धिक परीक्षा के बाद अंततः उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले संस्थानों के नाम सामने आए। प्राप्त आधिकारिक विवरणों के अनुसार मनियां और उप्रावि ने इस पूरी प्रतियोगिता में अपने प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इन संस्थानों के विद्यार्थियों ने परीक्षा के दौरान पूछे गए पेचीदा और महत्वपूर्ण सवालों के सटीक जवाब देकर अपनी असाधारण प्रतिभा का लोहा मनवाया। कार्यक्रम के दौरान आयोजकों और उपस्थित शिक्षकों ने विजेता प्रतिभागियों के इस बेहतरीन प्रदर्शन की खुलकर सराहना की और इसे अन्य बच्चों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा का स्रोत बताया। इस सफलता के बाद से विजेता संस्थानों में खुशी का माहौल है और सभी लोग इन मेधावी बच्चों की इस शानदार उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
युवाओं में राष्ट्र बोध जगाने का अभियान इस तरह की बौद्धिक प्रतियोगिताएं आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी के भीतर अपने देश के इतिहास संस्कृति भूगोल और परंपराओं के प्रति गहरी समझ विकसित करना होता है। आज के आधुनिक दौर में जब युवा पश्चिमी संस्कृति की तरफ तेज़ी से आकर्षित हो रहे हैं ऐसे आयोजन उन्हें अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़े रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्कूलों और शैक्षणिक मंचों के माध्यम से आयोजित होने वाली इन प्रतियोगिताओं में सामान्य ज्ञान से लेकर हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों और ऐतिहासिक घटनाओं तक के बारे में प्रश्न पूछे जाते हैं। शिक्षकों और शिक्षाविदों का हमेशा से यह मानना रहा है कि किताबी ज्ञान के अलावा इस प्रकार की अतिरिक्त गतिविधियां बच्चों के मानसिक विकास और उनके संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण में सहायक होती हैं। जब छात्र इन आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं तो उनमें न केवल प्रतिस्पर्धा की स्वस्थ भावना विकसित होती है बल्कि देश के प्रति उनका लगाव और सम्मान भी और अधिक मजबूत होता है।
सफलता के बाद आगे की राह और उत्साह मनियां और उप्रावि जैसी जगहों पर मिली इस बड़ी सफलता के बाद स्थानीय स्तर पर शिक्षा के माहौल में एक नया उत्साह देखने को मिल रहा है। इस तरह के आयोजनों से न केवल जीतने वाले संस्थानों का मान बढ़ता है बल्कि आसपास के अन्य विद्यालयों के छात्रों में भी आगामी प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर तैयारी करने की प्रेरणा जागती है। आयोजकों ने संकेत दिया है कि भविष्य में इस प्रकार के बौद्धिक मंचों का दायरा और अधिक बढ़ाया जाएगा ताकि अधिक से अधिक छात्र अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर पा सकें। अभिभावकों और शिक्षकों का भी यही कहना है कि बच्चों की इस प्रकार की उपलब्धियों को उचित मंच और प्रोत्साहन मिलना चाहिए ताकि वे भविष्य में राज्य और देश स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकें। इस परिणाम ने यह साबित कर दिया है कि यदि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के बच्चों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे किसी भी मुकाबले में पीछे नहीं रहते हैं और अपनी मेहनत के दम पर शीर्ष स्थान हासिल कर सकते हैं।