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गोमती का उफान: जलस्तर 108.14 मीटर पहुंचा, मंदिर डूबे और नाव चली

उत्तर प्रदेश की राजधानी में गोमती नदी का जलस्तर सामान्य से आठ फीट ऊपर पहुंच गया है। नदी के विकराल रूप से कई रिहायशी इलाके और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जलमग्न हो गए हैं। प्रशासन ने स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं।

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Ankit Yadav
05 अक्ट 2026, 12:04
गोमती का उफान: जलस्तर 108.14 मीटर पहुंचा, मंदिर डूबे और नाव चली

गोमती नदी का बढ़ा जलस्तर और खतरे की जद में आए धार्मिक स्थल

राजधानी के भीतर बहने वाली गोमती नदी का पानी सामान्य स्तर से लगभग आठ फीट ऊपर उठकर 108.14 मीटर के खतरनाक बिंदु तक जा पहुंचा है। इस अभूतपूर्व जलवृद्धि के कारण शहर के कई महत्वपूर्ण हिस्से बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। हनुमंत धाम मंदिर जिसे हनुमान सेतु मंदिर भी कहा जाता है, उसके परिसर में पानी भर चुका है। इसके साथ ही प्राचीन शनि देव मंदिर और लक्ष्मण मेला मैदान के चारों ओर भारी मात्रा में जलभराव देखा जा रहा है। प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान मंदिर के भीतर भी नदी का पानी प्रवेश कर चुका है। मुख्य पुरोहित विनोद तांगड़ी के अनुसार जलराशि हनुमान जी के चरणों तक पहुंच गई है और उन्हें शीघ्र स्नान कराने की स्थिति बन गई है। वर्ष 2006-07 के बाद यह पहला मौका है जब जलस्तर में इतनी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस गंभीर परिस्थिति के चलते गोमती रिवरफ्रंट पर स्थित फूड वैली को एहतियात के तौर पर पूरी तरह बंद कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे राहत कार्य और नावों की तैनाती

बख्शी का तालाब तहसील के अंतर्गत आने वाले लासा, बहादुरपुर, सुल्तानपुर और अकड़िया मऊ जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ का संकट लगातार बना हुआ है। हालांकि कुछ गांवों में पानी की सतह पर हल्की गिरावट जरूर दर्ज की गई है, परंतु स्थानीय नागरिकों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रभावित इलाकों में लोगों की आवाजाही को सुगम बनाने और मदद पहुंचाने के उद्देश्य से प्रशासन ने कुल तीस नौकाओं को तैनात किया है। इसके अलावा चार राहत शिविर और सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं जहां विस्थापित लोगों को सुरक्षित रखकर भोजन तथा अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। जिला मजिस्ट्रेट विशाख जी और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने स्वयं इन क्षेत्रों का दौरा किया और नाव पर सवार होकर जमीनी हालातों का जायजा लिया। जिला मजिस्ट्रेट ने राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने पर कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी जारी की है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर मेडिकल किट और क्लोरीन की गोलियां वितरित कर रही हैं, जबकि पशुपालन विभाग मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था और बीमार पशुओं के उपचार में जुटा है।

फैजुल्लागंज के हालात और प्राचीन परंपराओं के अनुसार पूजन के निर्णय

फैजुल्लागंज इलाके में भी बाढ़ के कारण हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं जहां जिला मजिस्ट्रेट ने स्वयं पहुंचकर पीड़ित परिवारों को सूखी राशन सामग्री की किट बांटी और उनकी समस्याएं सुनीं। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने भी फैजुल्लागंज का दौरा करके वहां ड्रेनेज व्यवस्था, फॉगिंग और बचाव कार्यों की गहन समीक्षा की। नगर निगम की तरफ से बड़े पंपसेट लगाकर रिहायशी बस्तियों से पानी बाहर निकाला जा रहा है, जबकि मच्छरों के बढ़ते प्रकोप पर लगाम कसने के लिए पहली बार ड्रोन के माध्यम से एंटी-लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। नदी के बहाव से डाउनस्ट्रीम की करीब बीस से पच्चीस प्रतिशत आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जलस्तर अत्यधिक बढ़ जाने के कारण मंदिर के बाहर से ही पूजा-अर्चना करने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान हनुमान जी को लाल चादर अर्पित की जाएगी और दूर से ही भोग लगाकर आरती संपन्न की जाएगी। परंपरा के अनुसार जलमग्न होने पर देवता विश्राम अवस्था में चले जाते हैं इसलिए उन्हें व्यवधानित नहीं किया जाता है। स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग के सभी अधिकारियों को चौबीस घंटे पूरी तरह से अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

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