जेल में बंद कैदी की अस्पताल में मौत
गोरखपुर जिला जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 72 वर्षीय परवेज परवाज की शनिवार तड़के मृत्यु हो गई। परवेज काफी समय से गंभीर रूप से बीमार था और उसे शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं। शनिवार देर रात उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने पर जेल अधिकारियों ने उसे तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां चिकित्सकों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन तड़के करीब दो बजे उसने दम तोड़ दिया। जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय ने बताया कि कैदी की खराब सेहत को देखते हुए प्रशासन पहले से ही उसके उपचार के प्रति सतर्क था। कुछ समय पूर्व ही जेल प्रशासन ने उसकी आंखों का ऑपरेशन भी संपन्न कराया था। राजघाट थाना क्षेत्र के तुर्कमानपुर निवासी परवेज पिछले करीब आठ वर्षों से जेल में बंद था। उसकी मौत के बाद कानूनी औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है ताकि मृत्यु के स्पष्ट कारणों की पुष्टि हो सके।
दुष्कर्म के मामले में सुनाई गई थी सजा
परवेज परवाज को जून 2018 में एक महिला द्वारा दर्ज कराए गए दुष्कर्म के गंभीर मामले में दोषी ठहराया गया था। महिला ने आरोप लगाया था कि परवेज और उसके साथी महमूद उर्फ जुम्मन बाबा ने उसे झाड़-फूंक का बहाना बनाकर बुलाया और रिवाल्वर दिखाकर उसका शारीरिक शोषण किया। पीड़िता ने बताया कि वह अपने वैवाहिक विवाद को सुलझाने के लिए जुम्मन बाबा के संपर्क में आई थी और उसी ने उसे साजिश के तहत पांडेयहाता स्थित एक दुकान के पास बुलाया था। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इस मामले की सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। कोर्ट ने उन्हें आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी और प्रत्येक पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि जुर्माने की राशि में से 40 हजार रुपये पीड़िता के पुनर्वास के लिए दिए जाएं। यदि जुर्माना जमा नहीं होता, तो दोनों को अतिरिक्त एक वर्ष की सजा काटनी पड़ती। उल्लेखनीय है कि परवेज के साथ इस मामले में दोषी ठहराए गए जुम्मन बाबा की पहले ही मृत्यु हो चुकी है।
योगी आदित्यनाथ के खिलाफ केस से आया था चर्चा में
परवेज परवाज का नाम पहली बार वर्ष 2007 में तब चर्चा में आया था, जब उसने तत्कालीन सांसद और वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। परवेज ने अदालत के माध्यम से गोरखपुर में हुए दंगों को लेकर धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप में मुख्यमंत्री समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। उसने साक्ष्य के तौर पर एक सीडी प्रस्तुत की थी, जिसकी जांच के दौरान उसमें छेड़छाड़ किए जाने का खुलासा हुआ था। इस घटनाक्रम के बाद परवेज परवाज के विरुद्ध स्वयं भी कानूनी कार्रवाई शुरू हुई और उसके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया था। दंगों की अवधि के दौरान उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी रासुका के तहत भी कठोर कार्रवाई की गई थी। उस मामले से जुड़ी कानूनी लड़ाई उसने लंबे समय तक लड़ी थी, जिसमें बाद में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई थी। अब आठ वर्ष की जेल की सजा काटने के दौरान उसकी मृत्यु ने उस पुराने विवादित प्रकरण और उसके हालिया आपराधिक जीवन के अध्याय को समाप्त कर दिया है।