कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
'आजम थे, हैं और रहेंगे, फर्जी मुकदमे लंबे समय तक उन्हें कैद नहीं रख सकते', जेल में मुलाकात के बाद बोले अखिलेश      CJP के सौरव दास-आशुतोष रांका को क्राइम ब्रांच ने बुलाया, नोटिस में क्या लिखा?      सऊदी अरब में बांग्लादेशी महिला कामगार कितनी सुरक्षित हैं?      तिब्बत में 7 की तीव्रता के भूकंप ने मचाई तबाही, 16 लोगों की मौत, 32 लोग घायल; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी      गोल्डी ने कहा था- घर गिरा दो, वापस नहीं आऊंगा: लॉरेंस के साथ गैंगस्टर बना, अमेरिका को तलाश; पंजाब में घर खा...      टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: कोर्ट में फूट-फूटकर रोई राधा, अब पुलिस उगलवाएगी राज      चुनाव आयोग अधिकारी पर बिना चर्चा फैसले लेने का आरोप: संधू-जोशी ने कैबिनेट सचिव से शिकायत की थी, कार्रवाई नह...      UP, बिहार और महाराष्ट्र समेत 4 राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर आज वोटिंग, CM योगी के गढ़ में सपा से सीधी टक्कर     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
लोकल

गोरखपुर में जल प्रलय: 57 गांवों का संपर्क टूटा, नाव ही आवाजाही का एकमात्र सहारा

गोरखपुर जिले के 57 गांवों में भीषण बाढ़ के कारण जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है। सड़कों के जलमग्न होने से स्थानीय लोग नावों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए मजबूर हैं।

A
Ankit Yadav
03 अक्ट 2026, 17:54
गोरखपुर में जल प्रलय: 57 गांवों का संपर्क टूटा, नाव ही आवाजाही का एकमात्र सहारा

बाढ़ से प्रभावित 57 गांवों का हाल

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में मौजूदा बाढ़ की स्थिति ने भारी तबाही मचाई है, जिससे जिले के कुल 57 गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 70,000 लोग जलभराव के कारण अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर सड़कें पूरी तरह से डूब चुकी हैं, जिसके कारण आवागमन का सारा आधारभूत ढांचा ध्वस्त हो चुका है। कई गांव मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट गए हैं और अलग-थलग पड़ गए हैं, जिससे इन बस्तियों तक पहुंचना एक कठिन चुनौती बन गया है। जिले की प्रमुख नदियां लगातार खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिसके दबाव से निचले इलाकों में पानी तेजी से घुस गया है। वर्तमान में इन निवासियों के पास यात्रा करने या दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल नावों का विकल्प बचा है। यह स्थिति क्षेत्र के जनजीवन की सामान्य गति को पूरी तरह से बाधित कर चुकी है और लोग भारी संकट का सामना कर रहे हैं।

जिला प्रशासन द्वारा राहत और नावों की व्यवस्था

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रभावित लोगों की मदद के लिए युद्धस्तर पर बचाव कार्य शुरू किए हैं। प्रशासन द्वारा विशेष रूप से नावों का इंतजाम किया गया है ताकि लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित पहुँचाया जा सके। इस कार्य के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों से अनुभवी नाव खेने वालों को गोरखपुर बुलाया गया है ताकि निवासियों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। इन नावों का उपयोग केवल सामान्य आवाजाही के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी आपातकालीन स्थितियों और अन्य आवश्यक सेवाओं को पहुंचाने के लिए भी किया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित बस्तियों में रहने वाले हजारों लोगों की निर्भरता पूरी तरह से इन सरकारी नावों पर ही टिक गई है। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है कि कहीं कोई ग्रामीण किसी भी जरूरी संसाधन की कमी से न जूझ रहा हो। स्वास्थ्य और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रशासन की टीमें नावों के जरिए ही प्रभावित क्षेत्रों तक आवश्यक सामग्री और चिकित्सा सहायता पहुंचा रही हैं।

मानसून का असर और भविष्य की चुनौतियां

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल देश भर में मानसून की बारिश में 13 फीसदी की कमी दर्ज की गई है, फिर भी गोरखपुर जिले में बाढ़ का प्रकोप असामान्य रूप से अधिक है। यह स्थिति स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि बाढ़ का पानी उतरने में समय लगने की संभावना है। सड़कें जलमग्न होने के कारण यातायात का आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध है, जिससे भविष्य में सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है। हजारों लोग जो बाढ़ के कारण अपने घरों में फंसे हैं, उन्हें अभी भी लंबे समय तक नावों के सहारे ही जीवन यापन करना पड़ेगा। बाढ़ का यह प्रभाव न केवल दैनिक मजदूरी और कामगारों के लिए कठिनाई पैदा कर रहा है, बल्कि स्थानीय कृषि और बस्तियों की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाल रहा है। आने वाले दिनों में नदियों का जलस्तर कम होने पर ही स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा सकती है, तब तक प्रशासन द्वारा तैनात नावों का तंत्र ही इन 57 गांवों की जीवन रेखा बना रहेगा।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज