प्रस्तावित हाईस्पीड रेल गलियारे की रूपरेखा
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से धार्मिक नगरी तक बनने वाले इस अत्याधुनिक गलियारे की कुल लंबाई लगभग 865 किलोमीटर तय की गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल खर्च का अनुमान 1.21 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा पूरी रूपरेखा तैयार कर समीक्षा के पश्चात संबंधित मंत्रालय को भेज दी गई है। इस पूरे ट्रैक पर ट्रेनों की डिजाइन गति 350 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है, जबकि संचालन के दौरान इनकी रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा रखी जाएगी। इस मार्ग पर ज्यादातर ट्रैक एलिवेटेड यानी ऊंचे खंभों पर बनाए जाने की योजना है, जिससे जमीन की आवश्यकता को न्यूनतम रखा जा सके। इसके अलावा ग्राउंड और एरियल स्तर पर लेजर तकनीक आधारित सर्वे का कार्य पहले ही संपन्न हो चुका है। मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद ही इस बड़े प्रोजेक्ट के तहत आगे की जमीनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
विभिन्न शहरों के बीच कम होगा यात्रा का समय
इस तेज रफ्तार रेल सेवा के शुरू हो जाने पर यात्रियों को पारंपरिक गाड़ियों की तुलना में काफी कम समय लगेगा। वर्तमान समय में सामान्य गाड़ियों से इस संपूर्ण मार्ग को पार करने में करीब 11 से 12 घंटे का वक्त बर्बाद होता है, जो हाईस्पीड ट्रेन के आने से घटकर सिर्फ 3 घंटे 50 मिनट रह जाएगा। इसी प्रकार राजधानी क्षेत्र लखनऊ से काशी की दूरी सिमटकर मात्र 1 घंटा 20 मिनट पर आ जाएगी, जबकि अभी इस फासले को पाटने में 4 से 6 घंटे तक लग जाते हैं। संगम नगरी प्रयागराज से काशी की यह दूरी लगभग 30 मिनट में और लखनऊ तक की यात्रा लगभग 55 मिनट में पूरी हो सकेगी। इस नेटवर्क के अंतर्गत राज्य के कई प्रमुख हिस्से जोड़े जाएंगे जिनमें नोएडा का चौदहवां सेक्टर, जेवर हवाई अड्डा क्षेत्र, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, राजधानी लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और काशी जैसे स्थान शामिल हैं। काशी में मंडुआडीह स्टेशन बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है।
अयोध्या लिंक और भविष्य की निर्माण योजना
धार्मिक पर्यटन को विशेष प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से राजधानी क्षेत्र से भगवान राम की जन्मस्थली के मध्य लगभग 135 किलोमीटर लंबा अतिरिक्त संपर्क मार्ग बनाने का भी विचार चल रहा है। इस विशिष्ट लिंक के बन जाने पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सीधे इस पवित्र शहर तक का सफर लगभग 3 घंटे के भीतर पूरा किया जा सकेगा, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि इस विशेष लिंक का अंतिम स्वरूप और निर्माण कार्य पूरी तरह मुख्य परियोजना की स्वीकृति पर निर्भर करेगा। इसके अलावा यमुना एक्सप्रेसवे और नोएडा के इलाके में कुल तीन स्टॉपेज बनाने के विकल्पों पर मंथन चल रहा है, जिसमें जेवर हवाई अड्डे के निकट एक भूमिगत स्टेशन और लगभग 8.8 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड ट्रैक शामिल है। यदि सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार चलता रहा तो इस परियोजना पर निर्माण कार्य 2027 से 2028 के बीच आरंभ हो सकता है और वर्ष 2031 तक इसका संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।