राजाजी और कार्बेट टाइगर रिजर्व में सैलानियों की भीड़
हर साल पर्यटक सीजन के दौरान पंद्रह नवंबर से पंद्रह जून तक बड़ी संख्या में पर्यटक राजाजी टाइगर रिजर्व और कार्बेट टाइगर रिजर्व पहुंचते हैं। एशियाई हाथियों की प्रमुख सैरगाह माने जाने वाले राजाजी टाइगर रिजर्व को पिछले सीजन में तीन करोड़ छियालीस लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इस आर्थिक लाभ से रिजर्व के आसपास स्थित ईको विकास समितियों के साथ ही स्थानीय होटल, रिजार्ट और होम स्टे संचालकों को भी काफी अच्छी आय हुई। ऐसा ही शानदार आर्थिक और पर्यटन परिदृश्य कार्बेट टाइगर रिजर्व के क्षेत्र में भी देखने को मिलता है। इन संरक्षित क्षेत्रों में आने वाले सैलानी इन विशाल जीवों को देखकर काफी आनंदित होते हैं और राज्य के पर्यटन कारोबार को गति प्रदान करते हैं। पर्यटन सत्र के दौरान देश और दुनिया के विभिन्न कोनों से प्रकृति प्रेमी इन पार्कों का रुख करते हैं। स्थानीय आजीविका चलाने वाले लोगों के लिए यह सीजन काफी मददगार साबित होता है और इससे पूरे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आती है। इन तमाम सकारात्मक पहलुओं के चलते राज्य में वन्यजीव पर्यटन का दायरा लगातार विस्तृत होता जा रहा है और पर्यटकों की संख्या में भी निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
हाथी संरक्षण के प्रयास और सफारी का नया आकर्षण
राष्ट्रीय विरासत पशु के रूप में दर्ज हाथियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार और वन विभाग ने बेहद गंभीर कदम उठाए हैं। इन्हीं निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि उत्तराखंड में हाथियों की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। वर्ष दो हजार सात में राज्य में इनकी संख्या तेरह सौ छियालीस आंकी गई थी, जो वर्ष दो हजार बीती गणना के अनुसार बढ़कर दो हजार छब्बीस तक पहुंच गई। इसके अलावा हाल ही में नई हाथी गणना का कार्य पूरा हो चुका है और इसके आधिकारिक परिणाम बहुत जल्द जारी किए जाएंगे। राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे के अनुसार इन जीवों के संरक्षण की दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है। सैलानियों के मनोरंजन और आकर्षण को बढ़ाने के लिए राजाजी रिजर्व में हाथी सफारी भी शुरू की गई है। पिछले साल से यहां दो अलग-अलग रूटों पर हाथी सफारी का संचालन किया जा रहा है जिसमें राधा और रंगीली नाम की दो हथिनियों की सेवाएं ली जाती हैं। इस रिजर्व में कुल नौ पालतू हाथी मौजूद हैं जो पर्यटन और प्रबंधन कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसी प्रकार कार्बेट टाइगर रिजर्व में चौदह पालतू हाथी हैं जो पर्यटकों के लिए सफारी का हिस्सा बनने के साथ ही विभागीय कार्यों में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
जंगल की सुरक्षा और प्रदेश भर में हाथियों का विस्तार
पालतू हाथियों का उपयोग केवल सैलानियों को सैर कराने तक ही सीमित नहीं है बल्कि ये वन्य क्षेत्रों की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाते हैं। वर्षाकाल के दौरान जंगल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए इन प्रशिक्षित हाथियों की सेवाएं गश्त के कार्यों में ली जाती हैं। ये हाथी घने जंगलों और दुर्गम रास्तों पर आसानी से आवाजाही कर लेते हैं जिससे वन कर्मियों को गश्त करने में बड़ी मदद मिलती है। बात करें इन विशालकाय जीवों की मौजूदगी की तो राज्य के कई प्रमुख इलाकों और वन प्रभागों में इनका बसेरा है। राजाजी और कार्बेट टाइगर रिजर्व के अलावा देहरादून, लैंसडौन, कालसी, हरिद्वार, नरेंद्रनगर, तराई पूर्वी और तराई केंद्रीय वन प्रभागों में इनकी अच्छी खासी उपस्थिति दर्ज है। इसके अलावा रामनगर, हल्द्वानी, तराई पश्चिमी और चंपावत वन प्रभाग भी इन हाथियों के प्रमुख प्राकृतिक आवास माने जाते हैं। इन तमाम क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा हाथियों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक गलियारों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष निगरानी रखी जाती है। स्थानीय स्तर पर वन्यजीव अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा इनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है ताकि इंसानों और हाथियों के बीच किसी भी तरह का टकराव टाला जा सके और दोनों का सहअस्तित्व सुरक्षित बना रहे।