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हाथी का आतंक: रामनगर में पंद्रह घंटे तक मचा हड़कंप, वन विभाग और पुलिस परेशान

रामनगर में रामलीला के लिए आया एक हाथी रविवार सुबह अचानक बिदक गया। हाथी के बेकाबू होने से इलाके में पंद्रह घंटे तक भारी दहशत और अफरातफरी का माहौल बना रहा। वन विभाग और स्थानीय पुलिस उसे नियंत्रित करने में जुटी रही।

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Ankit Yadav
19 अक्ट 2026, 15:09
हाथी का आतंक: रामनगर में पंद्रह घंटे तक मचा हड़कंप, वन विभाग और पुलिस परेशान

पंचवटी मैदान के पास हाथी हुआ बेकाबू

रविवार की सुबह रामलीला प्रयोजन के लिए लाया गया एक विशाल हाथी पंचवटी मैदान के नजदीक अचानक से हिंसक और उत्तेजित हो गया। इस घटना के बाद से ही प्रशासनिक अमले और वन विभाग के हाथ-पांव फूल गए क्योंकि जानवर लगातार अपनी दिशा बदल रहा था। कभी वह पंचवटी और लंका मैदान की तरफ बने रास्तों पर दौड़ता नजर आता, तो कभी किसी घने बगीचे के अंदर छिप जाता था। कभी वह आवासीय बस्तियों के मकानों की तरफ रुख करता तो कभी सड़क पर आवाजाही कर रहे आम लोगों की तरफ बढ़ने लगता। इस प्रकार की हरकतों के चलते आसपास के पूरे इलाके में भारी दहशत और भगदड़ जैसा माहौल पैदा हो गया था। सुबह ग्यारह बजे के आसपास वाराणसी, चंदौली और चकिया जैसे विभिन्न क्षेत्रों से वन विभाग की कई टीमें मौके पर पहुंच गईं। हालांकि शुरुआती घंटों में उनके पास बचाव कार्य के लिए जरूरी साधनों की भारी कमी थी। इस वजह से वे सिर्फ तेज आवाजें निकालकर जानवर को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने की कोशिश कर रहे थे। वन विभाग का पूरा जोर इसी बात पर था कि किसी तरह यह विशाल जानवर रिहायशी इलाकों की तरफ प्रवेश न कर सके।

गोरखपुर चिड़ियाघर से बुलाई गई विशेषज्ञ टीम

स्थानीय स्तर पर प्रयास नाकाम साबित होने के बाद प्रशासन ने गोरखपुर चिड़ियाघर से एक विशेष दल को मदद के लिए आमंत्रित किया। उप निदेशक डॉक्टर योगेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में चार सदस्यों वाली यह प्रशिक्षित टीम रविवार की दोपहर को वाराणसी के लिए रवाना हुई। यह विशेषज्ञ दल अपने साथ आवश्यक दवाइयां और बेहोश करने वाली बंदूक यानी ट्रांक्विलाइजर गन लेकर रात को करीब साढ़े आठ बजे रामनगर पहुंच गया। यहां पहुंचते ही उन्होंने जानवर को अपने नियंत्रण में लेने की कार्रवाई तुरंत शुरू कर दी। हालांकि इस दौरान जानवर का मालिक यानी महावत अपने स्तर पर उसे शांत करने का लगातार प्रयास कर रहा था। महावत इस बात का विरोध कर रहा था कि जानवर को कोई भी दवा या इंजेक्शन न दिया जाए। इस आपसी खींचतान और विवाद के कारण बचाव अभियान में लगभग दो घंटे का अतिरिक्त समय बेकार चला गया। अंततः जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी तब रात को दस बजे वन विभाग ने औपचारिक रूप से इंजेक्शन देने की अनुमति प्रदान की। इसके बाद गोरखपुर से आई टीम ने अपनी सक्रियता बढ़ाई और आगे की कार्रवाई शुरू की।

जेसीबी से रास्ता बनाकार शुरू किया गया रेस्क्यू

विशेषज्ञ टीम को अंदर घने बगीचे तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा क्योंकि वहां कोई सुगम मार्ग नहीं था। इसके समाधान के लिए मौके पर एक जेसीबी बुलाई गई जिसकी मदद से अंदर जाने के लिए एक नया रास्ता तैयार किया गया। जब रास्ता समतल हो गया तब अठारह चक्कों वाला बड़ा ट्रक, क्रेन और अन्य भारी वाहन घटनास्थल के अंदर तक पहुंचाए गए। ट्रक को उचित स्थान पर खड़ा करके उसके ऊपर जानवर को चढ़ाने के लिए मिट्टी का ढेर डालकर एक ढलाननुमा रास्ता बनाया गया। इसके बाद रात के ग्यारह बजे विशेषज्ञ सदस्यों ने ट्रांक्विलाइजर गन का उपयोग करके जानवर को चार विशेष इंजेक्शन दागे। हालांकि इतनी भारी मात्रा में दवा दिए जाने के बावजूद उस समय तुरंत जानवर पर कोई खास असर नहीं देखा गया। इसके बावजूद बचाव दल लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रहा और स्थिति की निगरानी करता रहा। दूसरी तरफ स्थानीय पुलिस बल भी मुस्तैद रहा और एहतियात के तौर पर पंचवटी तथा लंका मैदान जाने वाले सभी रास्तों पर आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया।

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