वाराणसी के रामनगर में हाथी का हमला
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के रामनगर क्षेत्र में इन दिनों रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक उत्सव की शोभा बढ़ाने के लिए कई हाथियों को वहां लाया गया था। रविवार को इसी दौरान इनमें से एक हाथी अचानक हिंसक और अनियंत्रित हो गया। हाथी के मदमस्त होकर बिदक जाने से आयोजन स्थल पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और किसी को कुछ समझ नहीं आया कि अचानक क्या हो गया है। स्थिति को संभालने की हर मुमकिन कोशिश इस दौरान की जा रही थी। इसी गहमागहमी के बीच जब महावत ने हाथी को काबू में करने का प्रयास किया, तो उस विशाल जानवर ने उन पर हमला कर दिया। इस अचानक हुए प्रहार से महावत गंभीर रूप से घायल हो गए। तुरंत एंबुलेंस और अन्य माध्यमों से उन्हें अस्पताल भेजा गया जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज किया जा रहा है। घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और लोगों की भीड़ जुट गई है।
गोरखपुर चिड़ियाघर से भेजी गई विशेषज्ञ टीम
रामनगर में हाथी के पूरी तरह बेकाबू हो जाने के बाद स्थानीय स्तर पर उसे संभालना मुश्किल हो गया। इसके बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गोरखपुर चिड़ियाघर से एक विशेष टीम की सहायता मांगी गई। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए डॉ। योगेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में एक चार सदस्यीय दल गठित किया गया। यह विशेष टीम सभी आवश्यक बचाव उपकरणों और दवाओं के साथ मुस्तैद हुई। गोरखपुर से रवाना होकर यह चार सदस्यीय दल रविवार रात को रामनगर पहुंच गया। टीम के पास हाथी को बेहोश या शांत करने के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष ट्रांक्विलाइजर गन और अन्य दवाइयां मौजूद हैं। रामनगर पहुंचते ही उप निदेशक डॉ। योगेश प्रताप सिंह के निर्देशन में टीम ने बिना देर किए अपना रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया। वे लगातार हाथी को सुरक्षित तरीके से काबू में करने के लिए जरूरी रणनीतिक प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन और वन्यजीव विशेषज्ञों की यह टीम पूरी मुस्तैदी के साथ गजराज को शांत करने के कार्य में जुटी हुई है ताकि किसी अन्य प्रकार के नुकसान को रोका जा सके।
घटना की पृष्ठभूमि और रेस्क्यू का कारण
इस पूरी दुर्घटना के पीछे मुख्य वजह हाथी का करीब डेढ़ महीने पहले से मदमस्त होना बताई जा रही है। रामलीला जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजन में भीड़भाड़ के बीच हाथी के बिदक जाने से हालात पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गए। ऐसे विशाल वन्यजीव जब आक्रामक हो जाते हैं तो उन्हें सामान्य तरीकों से नियंत्रित करना असंभव हो जाता है। यही कारण है कि गोरखपुर चिड़ियाघर के वन्यजीव विशेषज्ञों को वाराणसी बुलाने का निर्णय लिया गया। डॉ। योगेश प्रताप सिंह की अगुवाई में यह दल रविवार दोपहर बाद ही गोरखपुर से वाराणसी के लिए चल पड़ा था। लंबी यात्रा तय करके यह टीम रात करीब साढ़े आठ बजे रामनगर के घटनास्थल पर जा पहुंची। वहां पहुंचते ही उन्होंने बिना समय गंवाए रेस्क्यू ऑपरेशन की कार्यवाही शुरू कर दी। इस घटना ने एक बार फिर बड़े आयोजनों में वन्य जीवों की सुरक्षा और आम जनता की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।