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हुनर को नई उड़ान: वाराणसी में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का दायरा बढ़कर 25 ट्रेड तक पहुंचा

वाराणसी में पारंपरिक कारीगरों के सशक्तिकरण के लिए विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का दूसरा संस्करण शुरू किया गया है। अब इस पहल में कुल 25 अलग-अलग ट्रेडों को जोड़कर स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं।

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Ankit Yadav
05 अक्ट 2026, 18:34
हुनर को नई उड़ान: वाराणसी में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का दायरा बढ़कर 25 ट्रेड तक पहुंचा

योजना का विस्तार और नए क्षेत्रों का समावेश

वाराणसी में स्थानीय हस्तशिल्पियों और विभिन्न पेशों से जुड़े लोगों के लिए सरकारी सहायता के द्वार विस्तृत हो गए हैं। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के उन्नत संस्करण 2.0 में अब प्रशिक्षण की सीमाओं को बढ़ाकर 25 ट्रेडों तक पहुँचा दिया गया है। पहले इस योजना के अंतर्गत केवल 11 पारंपरिक व्यवसाय शामिल थे, लेकिन अब पांच नए पारंपरिक और नौ आधुनिक तकनीकी ट्रेडों को इसमें जोड़ा गया है। नई सूची में मूर्तिकार, मालाकार, दूधवाला, भरभूजा और मछुआरा जैसे पारंपरिक कामगार शामिल हैं। साथ ही आधुनिक जरूरतों को देखते हुए कंप्यूटर, मोबाइल, ऑटोमोबाइल मरम्मत, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और सौंदर्य सेवा जैसे नौ नए क्षेत्र भी शामिल किए गए हैं। इस पहल का मूल उद्देश्य कारीगरों को बेहतर प्रशिक्षण देने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुसार तैयार करना है। यह योजना अब तकनीक और पारंपरिक दक्षता का संगम बन गई है, जिससे स्थानीय कामगारों को अपने हुनर को एक नई दिशा देने का मौका मिल रहा है।

प्रशिक्षण प्रक्रिया और वित्तीय प्रोत्साहन के प्रावधान

योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 10 दिनों का गहन व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस दौरान प्रत्येक प्रशिक्षार्थी को उनके कौशल को निखारने के लिए प्रतिदिन 500 रुपये का मानदेय सीधे उनके बैंक खातों में दिया जाएगा, जो कुल 5,000 रुपये तक होगा। उपायुक्त उद्योग अभिषेक प्रियदर्शी ने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण के बाद सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए जाएंगे और 15 हजार रुपये मूल्य की उपयोगी टूलकिट भी मुफ्त दी जाएगी। इस प्रशिक्षण के लिए आईटीआई, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड और अन्य मान्यता प्राप्त संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा ताकि कामगारों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिले। इसके अतिरिक्त, स्वरोजगार स्थापित करने के लिए सरकार ने 10 लाख रुपये तक के ऋण की सुविधा बिना किसी गारंटी या ब्याज के सुनिश्चित की है। इस ऋण पर 15 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान भी रखा गया है, जिससे कारीगरों पर आर्थिक बोझ न पड़े। यह पूरी व्यवस्था कामगारों को केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रखकर उन्हें आत्मनिर्भर उद्यमी बनाने की एक बड़ी रणनीति है।

डिजिटल बाजार से जुड़ाव और भविष्य की राह

पारंपरिक कारीगरों को अब अपने उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और जेम पोर्टल से जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए उन्हें विशेष डिजिटल प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे ऑनलाइन माध्यमों से अपनी सेवाओं और निर्मित वस्तुओं की बिक्री कर सकें। योजना के तहत प्रगतिशील कारीगरों को क्लस्टर एक्सपोजर विजिट पर भी ले जाया जाएगा, जिससे उन्हें उत्पाद विकास, बेहतर डिजाइन और नई मार्केटिंग तकनीकों की समझ मिल सके। यह प्रयास वाराणसी के कारीगरों की पहुंच को स्थानीय बाजारों से निकालकर सीधे बड़े डिजिटल बाजार तक सुनिश्चित करेगा। इस व्यापक पहल का उद्देश्य कारीगरों को उनके पारंपरिक काम के साथ आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुकूल बनाना है। योगी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य यह है कि हुनर को केवल संरक्षित ही न किया जाए, बल्कि उसे वित्तीय सहयोग और आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर विकास का मुख्य आधार बनाया जाए। इससे न केवल स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे बल्कि कारीगरों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में भी दीर्घकालिक सुधार आएगा।

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