कंटाप
NEWS
गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
मुझे गालियां पड़ेंगी, लेकिन...; योगेंद्र यादव ने कहा- अभी मोदी का इस्तीफा नहीं चाहते लोग      श्रद्धा दुबे तो निकली बड़ी खिलाड़ी, Z गैंग से भी कनेक्शन, लखनऊ लेकर आई पुलिस, बचना हुआ मुश्किल      Rain Alert: बन गया है कम दबाव का क्षेत्र, इन राज्यों में होने जा रही मूसलाधार बारिश, आंधी तूफान का भी अलर्ट      Tiger Shroff Attack Case में बड़ा खुलासा, वारदात से पहले शूटरों ने की थी बंदूक चलाने की प्रैक्टिस, हुआ था म      सऊदी अरब पर अटैक से भड़का भारत, विदेश मंत्रालय की दो टूक- तुरंत बंद हों हमले      फ्रांस में किस धर्म के कितने लोग, यहां कितने रहते हैं मुस्लिम?      30 साल तक..., SIR पर हंगामे के बीच अमित शाह की भविष्यवाणी, राहुल के विदेश दौरे पर भी तंज      दिल्ली में AAP और कांग्रेस की पार्षद भिड़ीं, MCD सदन में खींचतान के बाद आई हाथापाई की नौबत     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
लोकल

ईमेल विवाद: गोवा विशेष सारांश पुनरीक्षण में 97 मतदाता सूची से बाहर

गोवा में चल रहे विशेष सारांश पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। लगातार कई ईमेल भेजने के बावजूद लगभग एक सौ मतदाताओं के नाम सूची में नहीं जुड़ सके। इस स्थिति ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

A
Ankit Yadav
24 सित 2026, 10:42
ईमेल विवाद: गोवा विशेष सारांश पुनरीक्षण में 97 मतदाता सूची से बाहर

सात दिनों में आठ बार भेजी गई शिकायत गोवा में चल रहे विशेष सारांश पुनरीक्षण अभियान के दौरान प्रशासनिक तंत्र की एक बड़ी नाकामी उजागर हुई है जिसमें लगभग सत्तानबे नागरिकों के नाम मतदाता सूची से बाहर ही रह गए। प्रभावित लोगों ने अपनी तरफ से पूरी सजगता दिखाते हुए मात्र सात दिनों के भीतर संबंधित चुनाव अधिकारियों को आठ अलग-अलग ईमेल भेजे थे ताकि उनके नाम दस्तावेजों में शामिल किए जा सकें। इसके बावजूद निर्वाचन कार्यालय के स्तर पर इन डिजिटल्या आवेदनों पर समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। परिणाम यह हुआ कि तमाम कोशिशों और बार-बार गुहार लगाने के बाद भी इन पात्र नागरिकों के नाम अंतिम सूचियों में दर्ज नहीं हो सके। इस पूरी घटना से स्थानीय निवासियों में भारी रोष व्याप्त है और वे प्रशासनिक सुस्ती को इसकी मुख्य वजह मान रहे हैं।

मतदाता सूची पुनरीक्षण और प्रशासनिक प्रक्रिया भारत में चुनावी लोकतंत्र की मजबूती के लिए निर्वाचन आयोग हर साल मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण यानी स्पेशल समरी रिवीजन का आयोजन करता है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य नए मतदाताओं के नाम जोड़ना, प्रवासियों के नाम हटाना और गलतियों को सुधारना होता है ताकि आगामी चुनावों में हर एक वयस्क नागरिक अपने मताधिकार का स्वतंत्र रूप से प्रयोग कर सके। गोवा जैसे तटीय और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में यह प्रक्रिया और भी संवेदनशील हो जाती है क्योंकि वहां की भौगोलिक स्थिति और प्रवासन के पैटर्न अनूठे हैं। जिला स्तर पर तैनात चुनाव अधिकारी, बूथ लेवल अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होते हैं। डिजिटल माध्यमों जैसे ईमेल और ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग इस कार्य को तेज और सुगम बनाने के लिए ही शुरू किया गया था ताकि आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

चुनावी पारदर्शिता पर उठते गंभीर सवाल इस ताजा घटनाक्रम के सामने आने के बाद राज्यभर में प्रशासनिक मशीनरी की कार्यशैली को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले समूहों और स्थानीय राजनीतिक दलों का मानना है कि यदि डिजिटल शिकायतों पर इस तरह की लापरवाही बरती जाएगी तो लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव में लोगों का विश्वास डगमगा जाएगा। चुनाव आयोग को अब इस मामले की गंभीरता से जांच करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी भी वैध मतदाता को इस तरह की तकनीकी या प्रशासनिक उदासीनता का शिकार न होना पड़े। प्रभावित मतदाताओं के पास अब कानूनी और प्रशासनिक मंचों पर अपील करने का विकल्प बचा है ताकि आने वाले चुनावों से पहले उनकी सूचियों में सुधार किया जा सके। जानकारों का कहना है कि प्रशासन यदि समय रहते इन कमियों को दूर नहीं करता है, तो यह प्रशासनिक विफलता चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन साबित होगी।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज