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जल संरक्षण: बिलासपुर के तखतपुर क्षेत्र में सामुदायिक तालाब गहरीकरण अभियान का आज हुआ शुभारंभ

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड में जल संकट से निपटने और भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए आज जनसहयोग से सामुदायिक तालाब गहरीकरण अभियान की शुरुआत की गई है। इस श्रमदान अभियान में ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 17:32
जल संरक्षण: बिलासपुर के तखतपुर क्षेत्र में सामुदायिक तालाब गहरीकरण अभियान का आज हुआ शुभारंभ
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के अंतर्गत आने वाले तखतपुर क्षेत्र में जल संरक्षण की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण जन-आंदोलन का आगाज हुआ। गर्मी के दिनों में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की किल्लत से बचने के लिए स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायतों ने मिलकर सामुदायिक तालाबों के गहरीकरण और जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया है। आज सुबह स्थानीय विधायक और सरपंचों की उपस्थिति में ग्राम पंचायत परिसर से श्रमदान यात्रा निकालकर इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस योजना के तहत क्षेत्र के पांच प्रमुख पुराने तालाबों से गाद निकाली जाएगी ताकि मानसून के दौरान उनमें अधिक से अधिक वर्षा जल एकत्र हो सके।

श्रमदान में उमड़े ग्रामीण और युवा

उद्घाटन के पहले दिन ही सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण, युवा और महिलाएं अपने हाथों में फावड़ा और तगाड़ी लेकर तालाब के घाट पर पहुंच गए। उत्साह का यह माहौल देखकर ऐसा लग रहा था कि यह कोई शासकीय कार्यक्रम नहीं बल्कि कोई बड़ा सामाजिक उत्सव हो। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि तालाबों में साल दर साल जमा होती गाद के कारण उनकी जल संग्रहण क्षमता आधी रह जाती है, जिसे समय पर साफ करना बहुत जरूरी है। गहरीकरण के कार्य से न केवल भूजल स्तर ऊपर उठेगा बल्कि आसपास के खेतों में बोरवेल का जलस्तर भी सुधरेगा जिससे आगामी रबी फसल के दौरान सिंचाई में काफी आसानी होगी।

स्थानीय प्रशासन की अनूठी कार्ययोजना

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान में आधुनिक मशीनों के साथ-साथ पारंपरिक श्रमदान को भी प्राथमिकता दी जा रही है ताकि ग्रामीणों में अपने जल स्रोतों के प्रति अपनत्व की भावना पैदा हो सके। मनरेगा योजना के अभिसरण से इस कार्य को गति दी जा रही है जिससे मजदूरों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिल रहा है। पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यदि छत्तीसगढ़ के हर गांव में इस प्रकार के प्रयास किए जाएं, तो आने वाले वर्षों में राज्य का भूजल संकट इतिहास बन जाएगा।
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