पांच वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों पर शीघ्र होगा बड़ा निर्णय
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुनियादी ढांचे के विकास और नागरिकों को बेहतर नागरिक सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से एक नया प्रशासनिक कदम उठाया जा रहा है। शहर के विभिन्न हिस्सों में जलापूर्ति व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए पांच नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इन संयंत्रों के निर्माण से संबंधित प्रस्ताव लंबे समय से प्रशासनिक पटल पर विचाराधीन था जिस पर अब सरकार स्तर पर गंभीर विचार विमर्श शुरू हो चुका है। संबंधित महकमे के उच्चाधिकारी इस पूरी योजना के हर एक तकनीकी और वित्तीय पहलू की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आबादी और उसके अनुपात में पानी की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करना इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य है। शासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में इन सभी पांचों स्थलों का मुआयना किया है और अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। बहुत जल्द इस संदर्भ में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी जिसमें इस पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना जताई जा रही है। इस निर्णय के आने के बाद शहर के कई नए इलाकों में पेयजल संकट से स्थाई रूप से निजात मिलने की उम्मीद है।
परियोजना की रूपरेखा और प्रशासनिक प्रक्रिया का ब्यौरा
लखनऊ जिले के शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में जलापूर्ति के सुधार के लिए तैयार की गई इस महत्त्वाकांक्षी योजना के तहत पांच अलग-अलग जगहों पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने हैं। इन संयंत्रों के जरिए गंगा और गोमती नदी के साथ-साथ अन्य जल स्रोतों से आने वाले कच्चे पानी को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पूरी तरह शुद्ध किया जाएगा। नगर विकास विभाग और जल निगम के इंजीनियरों ने मिलकर इन संयंत्रों की क्षमता और इनकी दैनिक कार्यप्रणाली का पूरा खाका तैयार किया है। प्रत्येक प्लांट की क्षमता का निर्धारण संबंधित क्षेत्र की वर्तमान जनसंख्या और आगामी बीस वर्षों के अनुमानित विस्तार को ध्यान में रखकर किया गया है। बजट आवंटन और निर्माण एजेंसियों के चयन को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर मंथन का दौर अंतिम चरण में पहुंच चुका है। शासन के नुमाइंदों का कहना है कि इस परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए जाएंगे ताकि लागत में अनावश्यक वृद्धि न हो सके। स्थानीय निकायों और जल संस्थान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए भी विशेष कमेटियों का गठन किया गया है जो रोजाना के कार्यों की प्रगति रिपोर्ट सीधे शासन को सौंपेंगी। इन पांचों संयंत्रों के चालू हो जाने से न सिर्फ पानी के प्रेशर की समस्या दूर होगी बल्कि लोगों को स्वास्थ्यवर्धक और स्वच्छ पेयजल भी सुगमता से प्राप्त हो सकेगा।
पेयजल सुधार योजनाओं की पृष्ठभूमि और उनका महत्व
किसी भी आधुनिक शहर के विकास के लिए स्वच्छ पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सबसे बुनियादी और अहम आवश्यकता मानी जाती है। लखनऊ जैसे तेजी से फैलते महानगर में भूजल का स्तर लगातार नीचे गिरने के कारण सतही जल स्रोतों पर निर्भरता तेजी से बढ़ती जा रही है। पुरानी पाइपलाइनें और क्षमता से कम कार्य कर रहे पुराने जल शोधन संयंत्र अक्सर गर्मियों के दिनों में हांफने लगते हैं जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी ऐतिहासिक और भौगोलिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इन पांच नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों की स्थापना की दिशा में निर्णायक कदम उठाने का मन बनाया है। इस प्रकार की अवसंरचनात्मक परियोजनाएं न केवल नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करती हैं बल्कि शहर के समग्र विकास सूचकांक को भी बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक जल शोधन की क्षमता में समय रहते विस्तार नहीं किया जाता तब तक जलापूर्ति का प्रबंधन दुरुस्त रखना असंभव हो जाता है। सरकार के इस संभावित निर्णय से न केवल वर्तमान की जलापूर्ति संबंधी अड़चनें दूर होंगी बल्कि भविष्य की जरूरतों के लिए भी एक मजबूत आधारशिला तैयार हो जाएगी। आम नागरिकों और विभिन्न आवासीय कल्याण संघों ने भी सरकार के इस संभावित कदम का स्वागत किया है और इसके शीघ्र क्रियान्वयन की पुरजोर मांग की है।