अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट का रुख
जयपुर शहर की ऐतिहासिक विरासत और स्थापत्य कला पर मंडराते संकट को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त कदम उठाए हैं। जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की एकल पीठ ने शहर में हो रहे बेतरतीब और अवैध निर्माण कार्यों पर गंभीर चिंता जाहिर की है। न्यायालय ने इस विषय को जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया है क्योंकि पुरानी गुलाबी इमारतों के स्वरूप में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। अदालत का मानना है कि पुराने शहर में नई संरचनाएं जिस तरह से खड़ी की जा रही हैं, वे मौजूदा वास्तुकला से बिल्कुल मेल नहीं खाती हैं। इस अनियंत्रित विकास के कारण शहर की पारंपरिक बनावट और ऐतिहासिक पहचान धूमिल होती जा रही है। शहर की इस स्थिति पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं ताकि धरोहर के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखा जा सके और भविष्य में इसे संरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम सुनिश्चित किए जा सकें।
प्रशासन को जवाबदेही के निर्देश
अदालत ने जयपुर विकास प्राधिकरण और जयपुर नगर निगम को पुराने शहर के भीतर हुए समस्त अनधिकृत और अनियमति निर्माणों का विस्तृत सर्वे करने का आदेश दिया है। इन दोनों निकायों को दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में जमा करनी होगी। इसके अलावा, मुख्य सचिव सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर 11 बिंदुओं पर आधारित विस्तृत हलफनामा पेश करना है। इस हलफनामे में पिछले पांच वर्षों के दौरान किए गए निर्माण कार्यों, नियमों के उल्लंघन, की गई दंडात्मक कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने का विवरण मांगा गया है। इस मामले में सहायता प्रदान करने के लिए चार अधिवक्ताओं को न्याय मित्र नियुक्त किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि धरोहर का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है क्योंकि एक बार नष्ट हो जाने के बाद पुरानी वास्तुकला को उसी रूप में फिर से तैयार करना असंभव कार्य है।
वर्ल्ड हेरिटेज दर्जे पर बढ़ता खतरा
जयपुर का वॉल्ड सिटी क्षेत्र वर्ष 2019 में UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट के रूप में सूचीबद्ध किया गया था, जो अपनी अनूठी गुलाबी इमारतों और ऐतिहासिक महलों के लिए प्रसिद्ध है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि दिसंबर 2026 तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो शहर का यह वैश्विक दर्जा खतरे में पड़ सकता है। यूनेस्को द्वारा वर्ष 2023 और 2025 में भी जयपुर की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की जा चुकी है। विश्व के इतिहास में अब तक ओमान का अरेबियन ओरिक्स सैंक्चुअरी, जर्मनी की ड्रेस्डन एल्बे वैली, जॉर्जिया के मित्सखेता के ऐतिहासिक स्मारक और ब्रिटेन के लिवरपूल का यूनेस्को दर्जा छीना जा चुका है। अदालत की यह चिंता जयपुर की विशिष्ट वास्तुकला को बचाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। यदि भविष्य में नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो शहर के लिए अपनी ऐतिहासिक वैश्विक पहचान को कायम रखना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।