ततारपुर गांव में मकान गिरने की घटना
कानपुर देहात जिले के मालसा विकासखंड अंतर्गत आने वाली गौरीकरण न्याय पंचायत के ततारपुर गांव में यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है। लगातार हो रही भारी बारिश के बीच सलमा बेगम का मकान अचानक भरभराकर गिर गया, जो उनके दिवंगत पति खलील अहमद के नाम पर था। इस अचानक हुए हादसे में मकान की पूरी छत ढह गई, जिससे घर के अंदर मौजूद सारा सामान और जमा हुआ अनाज मलबे के नीचे दब गया। हालांकि, हादसे के समय परिवार के सदस्य घर से बाहर किसी काम में व्यस्त थे, जिसके चलते वे एक बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गए। यदि उस समय परिवार के लोग घर के भीतर होते, तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था। गांव के लोगों ने बताया कि घर के ढह जाने से परिवार की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है और उनके पास सिर छिपाने की जगह भी नहीं बची है।
सरकारी सहायता के लिए लगाई गुहार
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने अपना घर दोबारा बनाने और नुकसान की भरपाई के लिए कई बार स्थानीय ग्राम प्रधान और संबंधित उच्च अधिकारियों से संपर्क किया है। दुर्भाग्यवश, अभी तक उन्हें केवल मौखिक आश्वासन ही मिले हैं और धरातल पर किसी भी प्रकार की सहायता नहीं पहुंची है। परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना या आपदा राहत कोष के तहत मिलने वाली किसी भी सरकारी लाभ का कोई लाभ अभी तक नहीं मिल सका है। इस मामले में न तो अभी तक कोई आधिकारिक जांच हुई है और न ही प्रशासन की ओर से कोई मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि इस कठिन समय में पीड़ित महिला की कोई सुध नहीं ली जा रही है, जबकि उनका सब कुछ मलबे में तबाह हो चुका है।
मुआवजे और नए आवास की मांग
ततारपुर गांव के स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन के सामने पीड़ित परिवार के लिए तत्काल राहत की मांग को जोर-शोर से उठाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सलमा बेगम का परिवार इस समय खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है, इसलिए उन्हें तुरंत सरकारी आवास आवंटित किया जाना चाहिए ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। इसके अतिरिक्त, जो अनाज और अन्य घरेलू सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गया है, उसकी भरपाई के लिए आर्थिक मुआवजा मिलना बेहद जरूरी है। अभी तक सरकारी उदासीनता के कारण परिवार के सामने भुखमरी और बेघर होने का संकट गहरा गया है, जिसे लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। यदि जिला प्रशासन जल्द ही इस मामले को संज्ञान में लेकर उचित राहत राशि और आवास का बंदोबस्त नहीं करता है, तो स्थानीय लोग इसे एक बड़ी विफलता मान रहे हैं।