प्रतापगढ़ के सैन्य अधिकारी का निधन
प्रतापगढ़ जिले के पट्टी तहसील अंतर्गत बेलखरनाथ धाम ब्लॉक के सराय गनई गांव के निवासी कर्नल जय राम सिंह का देहांत हो गया है। मंगलवार की रात लगभग 11 बजे उन्होंने लखनऊ स्थित कमांड अस्पताल में अपना अंतिम समय बिताया। भारतीय सेना के एक सम्मानित सेवानिवृत्त अधिकारी के रूप में उनकी पहचान थी और उनके इस आकस्मिक निधन की सूचना मिलते ही उनके पैतृक गांव समेत पूरे इलाके में मातम छा गया है। उनके परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और मित्र काफी दुखी हैं और घर पर शोक का वातावरण बना हुआ है। उन्होंने अपने जीवन का एक लंबा काल भारतीय सेना में देश की रक्षा के लिए समर्पित किया था। कर्नल साहब की सादगी और मिलनसार व्यक्तित्व के चलते वे अपने क्षेत्र के निवासियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय और सम्मानित माने जाते थे। उनके निधन की खबर ने पूरे प्रतापगढ़ जिले को स्तब्ध कर दिया है और हर कोई उनके द्वारा किए गए राष्ट्र सेवा के कार्यों को याद कर रहा है।
जनप्रतिनिधियों ने जताया गहरा शोक
दिवंगत कर्नल जय राम सिंह के निधन पर कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह ने उनके निधन को एक अपूरणीय क्षति करार दिया है। साथ ही प्रो. शिवाकांत ओझा और पूर्व विधायक धीरज ओझा ने भी कर्नल साहब के सम्मान में शोक संदेश प्रेषित किया है। सभी नेताओं ने शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति व्यक्त की और ईश्वर से उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने की प्रार्थना की है। स्थानीय नागरिकों और शुभचिंतकों का मानना है कि कर्नल साहब ने जिस तरह से भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव एक प्रेरणा बनी रहेंगी। उनके सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए स्थानीय लोगों ने कहा कि वे केवल एक अच्छे अधिकारी ही नहीं, बल्कि एक नेक इंसान भी थे। क्षेत्र में उनके प्रति सम्मान का भाव उनकी अंतिम विदाई के समय स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था।
क्षेत्र में शोक और श्रद्धांजलि
कर्नल जय राम सिंह की सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका समाज के प्रति जुड़ाव कम नहीं हुआ था। वे अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में अपनी सहजता के लिए जाने जाते थे, जिसके कारण उनका निधन क्षेत्र के लोगों के लिए एक व्यक्तिगत क्षति जैसा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने हमेशा राष्ट्र सेवा के प्रति अपना अटूट समर्पण दिखाया, जो आज के समय में मिसाल है। उनके निधन से प्रतापगढ़ के सराय गनई गांव और आसपास के इलाकों में शोक की लहर व्याप्त है। लोग उनके मिलनसार व्यवहार के किस्से साझा कर रहे हैं और उनके द्वारा किए गए निस्वार्थ कार्यों को याद कर रहे हैं। हालांकि उनका सैन्य कार्यकाल समाप्त हो चुका था, लेकिन समाज में एक संरक्षक की भूमिका उन्होंने बखूबी निभाई थी। उनके निधन के बाद से इलाके में हर कोई उनकी यादों को संजो रहा है और उन्हें एक ऐसा व्यक्तित्व बता रहा है जो सदा स्मरणीय रहेगा। उनके परिजनों ने बताया कि पूरे इलाके के शुभचिंतक इस दुखद घड़ी में उनके साथ खड़े हैं।