सीतापुर में खाद्य विभाग का औचक निरीक्षण
त्योहारी सीजन और आगामी नवरात्र के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए सीतापुर जिले के खाद्य सुरक्षा विभाग ने बाजार में एक विशेष जांच अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत विभागीय अधिकारियों और निरीक्षकों की टीमों ने विभिन्न बाजारों में स्थित दुकानों का औचक निरीक्षण किया। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि पर्वों के दौरान उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की मिलावटी या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य सामग्री न बेची जाए। इसी क्रम में कार्रवाई करते हुए खाद्य विभाग की टीम ने कुल 13 अलग-अलग खाद्य पदार्थों के नमूने मौके से लिए। इन सभी नमूनों को सुरक्षित तरीके से सील बंद करके परीक्षण के लिए संबंधित प्रयोगशाला में भेजा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सामग्री तय मानकों के अनुरूप है या नहीं।
नमूनों की जांच और आगामी प्रयोगशाला परीक्षण
खाद्य विभाग की इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों में हड़कंप मच गया। टीम ने मिठाई, तेल, मसाले और अन्य रोजमर्रा की खाने की चीजों की दुकानों पर पहुंचकर बारिकी से छानबीन की। अधिकारियों ने दुकानदारों को साफ-सुथरा सामान बेचने और स्वच्छता के कड़े नियमों का पालन करने की सख्त हिदायत दी। जो 13 नमूने एकत्र किए गए हैं, उनकी विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही मिलावट की पुष्टि हो सकेगी। यदि प्रयोगशाला की जांच में किसी भी खाद्य पदार्थ में मिलावट या मानक के विपरीत तत्व पाए जाते हैं, तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का यह विशेष अभियान त्योहारों के दिनों तक लगातार जारी रहने की संभावना है ताकि आम जनता के स्वास्थ्य से कोई खिलवाड़ न हो सके।
त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा का महत्व
भारत में नवरात्र और अन्य प्रमुख त्योहारों के दौरान बाजार में मिठाइयों, दूध से बने उत्पादों और खाद्य तेलों की मांग में भारी बढ़ोतरी हो जाती है। इस बढ़ी हुई मांग का फायदा उठाने के लिए कई बार असमाजिक तत्व और मिलावटखोर बाजार में घटिया या मिलावटी सामान खपाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभागों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है ताकि ग्राहकों को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य वस्तुएं मिल सकें। जिला प्रशासन और खाद्य विभाग द्वारा की जाने वाली इस तरह की नियमित और औचक छापेमारी से मिलावटखोरों के हौसले पस्त होते हैं। आम नागरिकों के लिए भी यह जरूरी है कि वे किसी भी संदिग्ध खाद्य सामग्री की बिक्री की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें। इस प्रकार की प्रशासनिक सतर्कता से न केवल खाद्य जनित बीमारियों से बचाव होता है बल्कि बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता भी बनी रहती है।