लखनऊ एयरपोर्ट पर फ्लाइट डायवर्ट
रविवार की सुबह मौसम संबंधी खराब स्थितियों और परिचालन संबंधी बाधाओं के कारण एक विमान को उसके तय मार्ग से हटाकर चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतारा गया। यह घटना उस समय सामने आई जब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से नेपाल की राजधानी काठमांडू की ओर उड़ान भरने वाला एयर इंडिया का विमान संख्या AI215 अपने गंतव्य पर नहीं उतर सका। वायुमंडलीय बाधाओं के चलते इस विमान को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की तरफ मोड़ने का निर्णय लिया गया। विमान ने तय योजना के अनुसार सुबह के समय सात बजकर पचास मिनट पर इस स्थानीय हवाई अड्डे की रनवे पर सुरक्षित रूप से लैंडिंग पूरी की। इस दौरान यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए विमान को यहां सुरक्षित तरीके से जमीन पर लाया गया ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। हवाई अड्डे के अधिकारियों ने इस पूरी प्रक्रिया पर अपनी नजर रखी और विमान के उतरने के बाद सभी यात्रियों को आवश्यक राहत पहुंचाई। इस अचानक हुए मार्ग परिवर्तन से हालांकि यात्रियों को कुछ समय के लिए असमंजस का सामना करना पड़ा क्योंकि वे नेपाल जाने के लिए निकले थे और उन्हें उत्तर प्रदेश के इस बड़े शहर में उतरना पड़ गया। मौसम की खराबी के कारण विमानन कंपनियों को लगातार ऐसे एहतियाती कदम उठाने पड़ रहे हैं ताकि आसमान में यात्रा कर रहे लोगों की जान जोखिम में न पड़े।
कुवैत से आने वाली फ्लाइट का संचालन
इसी दौरान एक अन्य अंतरराष्ट्रीय उड़ान भी इसी हवाई अड्डे पर पहुंची जो कुवैत से उड़ान भरकर यहां तक आई थी। जज़ीरा एयरवेज की फ्लाइट संख्या J92539 जिसका कोड 9K-CBB है, उसने कुवैत से अपनी यात्रा शुरू की थी और वह भी इसी अवधि के दौरान लखनऊ के आसमान में पहुंची। इस विमान ने सुबह के समय छह बजकर सत्ताईस मिनट पर हवाई अड्डे की जमीन पर अपने पहिए टिकाए और सुरक्षित लैंडिंग पूरी की। विमान के यहां उतरने के बाद एयरलाइन और हवाई अड्डा प्रबंधन ने निर्धारित नियमों के तहत इसकी आगे की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद यह विमान कुछ देर यहां रुकने के पश्चात सुबह आठ बजकर तैंतीस मिनट पर अपने अगले गंतव्य के लिए यहां से रवाना हो गया। लखनऊ हवाई अड्डे के प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जितनी भी विमान सेवाएं खराब मौसम या अन्य कारणों से इस तरफ मोड़ी गई हैं, उन सभी के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। हवाई अड्डा प्रशासन की तरफ से यह जानकारी साझा की गई कि डायवर्ट होकर आने वाले सभी विमानों की सुरक्षित हैंडलिंग सुनिश्चित करने के वास्ते हर संभव और जरूरी ऑपरेशनल सहायता तुरंत उपलब्ध कराई गई। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि विमानों का संचालन सुचारू रूप से चलता रहे और तकनीकी या प्रबंधन स्तर पर किसी भी दल को कोई असुविधा न उठानी पड़े। ग्राउंड स्टाफ ने पूरी तत्परता दिखाते हुए दोनों उड़ानों के संचालन में पूरी मदद की।
देश के मैदानी इलाकों में बारिश
वर्तमान समय में देश के बड़े मैदानी हिस्सों में काफी अधिक मात्रा में बारिश दर्ज की जा रही है जिसका सीधा असर जनजीवन और यातायात पर पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर भी पिछले चार दिनों से लगातार बारिश का सिलसिला बिना रुके जारी है जिससे कई प्रकार की दिक्कतें पैदा हो रही हैं। वर्ष 2026 के सितंबर महीने के आखिरी हफ्ते में देश के अनेक क्षेत्रों में भारी वर्षा, बाढ़ जैसी परिस्थितियों और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड की घटनाएं देखने को मिल रही हैं। इस व्यापक बारिश का मुख्य और तात्कालिक कारण बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक विशेष मौसमी सिस्टम का सक्रिय होना है। सितंबर के तीसरे सप्ताह के दौरान खाड़ी क्षेत्र में एक कम दबाव का क्षेत्र यानी लो-प्रेशर एरिया बना था जो समय के साथ धीरे-धीरे डिप्रेशन और उसके बाद गहरे डिप्रेशन यानी डीप डिप्रेशन में तब्दील हो गया। यह शक्तिशाली मौसमी सिस्टम आगे बढ़ते हुए तेईस और चौबीस सितंबर के आसपास आंध्र प्रदेश तथा ओडिशा के तटीय इलाकों के पास ज़मीन से टकराया जिसे लैंडफॉल कहा जाता है। इसके पश्चात यह सिस्टम पश्चिम और उत्तर दिशा की ओर आगे बढ़ा तथा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचते-पहुंचते कमजोर पड़ गया। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार यह सिस्टम भले ही कमजोर हुआ लेकिन अपने साथ भारी मात्रा में नमी से भरी हवाएं लगातार लाता रहा। इस अवशिष्ट ताकत के प्रभाव की वजह से उत्तर प्रदेश के उत्तरी तथा मध्य भागों के ऊपर एक बार फिर से कम दबाव का क्षेत्र बन गया।