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लाइसेंस संकट: कानपुर में डिजिटल डीएल के 300 से अधिक आवेदन दो महीने से लटके

कानपुर में ड्राइविंग लाइसेंस को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया में तकनीकी बाधा सामने आई है। मुख्यालय से समय पर अनुमति न मिलने के कारण सैकड़ों आवेदन लंबित पड़े हैं। इससे वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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Ankit Yadav
04 अक्ट 2026, 14:48
लाइसेंस संकट: कानपुर में डिजिटल डीएल के 300 से अधिक आवेदन दो महीने से लटके

डिजिटल डीएल प्रक्रिया में तकनीकी रुकावट और लटके आवेदन

कानपुर शहर में वाहन चालकों को अपने ड्राइविंग लाइसेंस के डिजिटल और ऑनलाइन होने का इंतजार करते हुए लंबा समय बीत चुका है। देवी सहाय नगर के निवासी दीपक कनौजिया ने अगस्त महीने में ही अपने ड्राइविंग लाइसेंस को ऑनलाइन करवाने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए उन्होंने कार्यालय में सभी आवश्यक दस्तावेजों और प्रार्थना पत्र को समय पर विधिवत जमा करवा दिया था। लेकिन इतने दिन बीत जाने के बावजूद उन्हें मुख्यालय की ओर से किसी भी प्रकार का अप्रूवल यानी अनुमति नहीं मिल पाई है। इस प्रशासनिक और तकनीकी देरी के कारण उनके जैसे तमाम वाहन चालकों के आवेदन पूरी तरह से अधर में लटक गए हैं। कार्यालय के चक्कर काटने के बाद भी आवेदकों को केवल निराशा ही हाथ लग रही है क्योंकि प्रक्रिया पूरी होने का कोई निश्चित समय नहीं बताया जा रहा है। अधिकारियों की इस सुस्ती की वजह से डिजिटल प्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं और आम नागरिकों का समय अनावश्यक रूप से बर्बाद हो रहा है। दस्तावेज पूरी तरह से सही होने के बावजूद फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं और लोग कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इस समस्या से केवल एक या दो लोग नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में आवेदक प्रभावित हो रहे हैं जिन्हें अपने ही दस्तावेजों के सत्यापन के लिए दफ्तरों के कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

गोविन्द नगर के आवेदक की समस्या और दस्तावेजों की ऑनलाइन फीडिंग

कानपुर के ही गोविन्द नगर इलाके में रहने वाले रोहित खन्ना के सामने भी ठीक इसी तरह की बड़ी प्रशासनिक समस्या खड़ी हो गई है। उनके पुराने और पारंपरिक ड्राइविंग लाइसेंस की वैध समय सीमा इसी साल जून के महीने में पूरी तरह से समाप्त हो चुकी थी। इसके बाद उन्होंने अपने इस मैनुअल यानी कागजी लाइसेंस को दोबारा बनवाने और उसे डिजिटल रूप में ऑनलाइन फीड कराने का निर्णय लिया था। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने अगस्त महीने में ही विभाग के समक्ष अपना नया आवेदन प्रस्तुत कर दिया था। परंतु आवेदन जमा होने के बाद से लेकर अब तक किसी भी स्तर पर कोई सकारात्मक प्रगति देखने को नहीं मिली है। मुख्यालय स्तर से जरूरी अप्रूवल न मिलने के कारण उनका नया ड्राइविंग लाइसेंस अभी तक बनकर तैयार नहीं हो सका है। इस स्थिति के कारण उन्हें वाहन चलाने में भी कानूनी और व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बिना वैध लाइसेंस के सड़क पर निकलना जोखिम भरा होता है। रोहित खन्ना की तरह ही तीन सौ से अधिक अन्य लोग भी अपने लाइसेंस के नवीनीकरण और ऑनलाइन अपडेशन के लिए लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। विभाग की इस कार्यशैली से साफ जाहिर होता है कि ऑनलाइन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और जनता पिस रही है।

मुख्यालय स्तर से अनुमति ठप होने के कारण बढ़ती परेशानी

कानपुर के परिवहन और लाइसेंसिंग कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार वर्तमान समय में डिजिटल डीएल बनवाने की प्रक्रिया पूरी तरह से बाधित चल रही है। पिछले दो महीनों से मुख्यालय से मिलने वाला अप्रूवल पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है जिस कारण कोई भी नया या संशोधित लाइसेंस जारी नहीं हो पा रहा है। डिजिटल प्रणाली को बढ़ावा देने के दावे तो किए जा रहे हैं लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। अगस्त माह में आवेदन करने वाले दीपक कनौजिया और जून में मियाद पूरी होने वाले रोहित खन्ना जैसे तमाम लोग इस व्यवस्था की नाकामी का सीधा शिकार बन रहे हैं। तीन सौ से अधिक लोगों के आवेदन लंबित होने के बाद भी अभी तक इस तकनीकी या प्रशासनिक बाधा को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लाइसेंसधारक लगातार कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं ताकि उन्हें पता चल सके कि उनका आवेदन कब तक स्वीकृत होगा। लेकिन हर बार उन्हें निराशाजनक जवाब ही मिलते हैं जिससे जनता में रोष भी बढ़ने लगा है। यदि मुख्यालय स्तर से जल्द ही इन लंबित मामलों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में यह संकट और अधिक गंभीर रूप धारण कर सकता है।

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