दुबौली और चिलबिलवा में बिजली लाइनों की शिफ्टिंग का बड़ा खेल
गोरखपुर जिले के नईयापार विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले उच्च प्राथमिक विद्यालय दुबौली के ऊपर से 11 हजार वोल्ट की हाइटेंशन लाइन गुजर रही थी। शासन स्तर से इस खतरनाक तार को हटाने के लिए एक निश्चित बजट स्वीकृत किया गया था। पिछले साल मिले इसी बजट का उपयोग करके इस साल विद्यालय परिसर से लाइन को दूसरी जगह शिफ्ट कराया गया। इस प्रक्रिया के दौरान बिजली निगम के अभियंताओं ने नियमों की अनदेखी करते हुए बड़ा खेल कर दिया। विद्यालय परिसर के साथ-साथ कई अन्य खेतों के ऊपर से भी बिजली लाइनों को हटा दिया गया। मौके की स्थिति देखने पर साफ पता चलता है कि अधिकारियों ने अपनी सुविधा के अनुसार काम किया है। ग्यारह हजार वोल्ट की लाइन का एक पोल हटाने के नाम पर कई हजार रुपये वसूले गए हैं। जिन खेतों के ऊपर से पहले बिजली के तार गुजरते थे, लाइन हटने के बाद अब उन खेतों की बाजार में कीमत तेजी से बढ़ने लगी है। इसी नईयापार उपकेंद्र क्षेत्र के अंतर्गत चिलबिलवा डिप्टी टोला नामक स्थान भी आता है। कुछ समय पहले वहां तेज आंधी और बारिश के दौरान एलटी लाइन का एक पोल खेत के बीच में गिर गया था। उस गिरे हुए पोल को खेत से हटाकर सड़क किनारे स्थापित करने के लिए काफी समय से बातचीत चल रही थी। पोल के गिरते ही अधिकारियों ने पैसे लेकर तुरंत उसे खेत के बीच से उठाया और एक ही झटके में सड़क किनारे लगवा दिया।
कम पोल का एस्टीमेट बनाकर और अधिकारियों की कार्यशैली का पर्दाफाश
यह दोनों मामले यह साबित करने के लिए काफी हैं कि बिजली निगम के नईयापार उपकेंद्र के अभियंता किस तरह लाइन शिफ्टिंग की आड़ में अपनी कमाई कर रहे हैं। यदि यह पूरी लाइनिंग का काम नियमानुसार किया जाता तो इससे सीधे तौर पर बिजली विभाग को भारी राजस्व का लाभ पहुंचता। लेकिन ऐसा करने के बजाय केवल अभियंताओं और संबंधित कर्मचारियों की ही मोटी कमाई हो रही है। अधिकारियों द्वारा इस प्रकार का अवैध खेल लगातार धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। इसके अलावा अभियंता दूसरे तरीकों से भी भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं। यदि किसी इलाके में दस पोल की लाइन शिफ्ट करके सड़क के किनारे नए पोल लगाकर बिजली लाइन बिछानी होती है तो अभियंता केवल तीन या चार पोल का ही एस्टीमेट तैयार करते हैं। इस छोटे एस्टीमेट की धनराशि वे संबंधित उपभोक्ता से बिजली निगम के आधिकारिक खाते में जमा करवा देते हैं। इसके बाद बाकी बची हुई लंबाई के पोल, तार और अन्य जरूरी उपकरणों के नाम पर आने वाले पैसों को कनिष्ठ अभियंता यानी जेई खुद अपने पास रख लेते हैं। चूंकि उपभोक्ता को किसी भी हाल में अपना काम पूरा करवाना होता है, इसलिए वह अधिकारी के इस भ्रष्टाचार का विरोध नहीं करता है। दूसरी तरफ इस पूरे मामले पर जब नईयापार उपकेंद्र के जेई सुभाष चंद्र मौर्य से बात की गई तो उन्होंने लाइन शिफ्टिंग के कार्य को पूरी तरह सही ठहराया। दुबौली क्षेत्र में कुल कितने पोल शिफ्ट किए गए हैं, यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें पोल की सटीक संख्या याद नहीं है। वहीं चिलबिलवा डिप्टी टोला के मामले में उन्होंने मीडिया या किसी के सामने कोई भी स्पष्ट जवाब देने से पूरी तरह किनारा कर लिया।
मुख्य अभियंता की चेतावनी और राजस्व नुकसान की जांच का निर्देश
बिजली निगम के मुख्य अभियंता लोकेंद्र बहादुर सिंह ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पोल शिफ्टिंग का कार्य हमेशा वास्तविक जरूरत का आकलन करने के बाद ही किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उचित एस्टीमेट तैयार कर नियमों के तहत बिजली निगम के आधिकारिक खाते में ही पैसे जमा कराए जाने चाहिए। यदि मैदान में ऐसा नहीं हो रहा है तो यह स्थिति पूरी तरह गलत और नियमों के विरुद्ध है। मुख्य अभियंता ने यह भी आश्वासन दिया है कि ऐसे सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। बिजली विभाग के राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस तरह की अनियमितताओं के कारण आम जनता में भी बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। विभाग के उच्च अधिकारियों की इस चेतावनी के बाद अब स्थानीय स्तर के भ्रष्ट कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। आने वाले दिनों में जांच के दायरे में कई और नाम सामने आने की पूरी संभावना जताई जा रही है। इस प्रकार की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किस स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है।