कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
'शिमला में भुट्टो से मिली थीं इंदिरा', रूबियो से मुंबई में मिलने के विवाद पर बोले जयशंकर      'इतना अन्याय किसी परिवार के ऊपर नहीं हुआ होगा...', अखिलेश यादव ने आजम खान के लिए ऐसा क्यों कहा?      अनशन खत्म कराने डिप्टी CM ने लिए थे 500 करोड़? एकनाथ शिंदे vs मनोज जरांगे के बीच अब क्या पंगा      स्पीकर ओम बिरला की दो टूक, अगर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव...      गूगल के CEO सुंदर पिचाई से बोले ट्रंप- अभी अटलांटिक का नाम बदलो, फिर मैं प्रशांत      यूं ही नहीं फ्रांस से भारत तक हो रहे दंगे-प्रदर्शन, 13 देशों के 101 संगठनों का सीक्रेट नेटवर्क कर रहा काम      PM बोले-कुछ लोग विदेशों में भारत को बदनाम कर रहे: कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश क...      ज्ञानेश कुमार पर आर-पार, इस बार बीजेपी भी तैयार... SIR पर आज फिर छिड़ेगा संग्राम!     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
लोकल ब्रेकिंग

लखनऊ में बाढ़ का प्रकोप: फैजुल्लागंज की 40 हजार आबादी जलमग्न, आवाजाही के लिए नावों की मनमानी

लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से करीब 40 हजार घर पानी में डूब गए हैं। स्थानीय लोग खाद्य सामग्री और राशन की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं जबकि प्रशासन की तरफ से राहत के इंतजाम नदारद हैं।

A
Ankit Yadav
08 अक्ट 2026, 11:59
लखनऊ में बाढ़ का प्रकोप: फैजुल्लागंज की 40 हजार आबादी जलमग्न, आवाजाही के लिए नावों की मनमानी

फैजुल्लागंज में भारी जलभराव और जनजीवन अस्त-व्यस्त

लखनऊ के फैजुल्लागंज क्षेत्र में गोमती नदी के जलस्तर में हुई अप्रत्याशित वृद्धि से बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं। इस आपदा के कारण इलाके की दर्जनों कॉलोनियों के लगभग 40 हजार मकान 4 से 6 फीट तक पानी में पूरी तरह डूब चुके हैं। जलभराव इतना गंभीर है कि मुख्य मार्गों से लेकर रिहायशी गलियों तक में नाव के बिना निकलना असंभव हो गया है। बाजार पूरी तरह बंद पड़े हैं, जिससे स्थानीय लोगों के लिए दैनिक उपयोग की वस्तुओं और राशन का मिलना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। खाद्य सामग्री की कमी ने निवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई परिवारों ने अपनी जान बचाने और सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचने के लिए मजबूरन अपने रिश्तेदारों के घर शरण ले ली है। बच्चों की स्कूल किताबें, घर का कीमती सामान और गृहस्थी का सारा सामान पानी में भीगकर नष्ट हो गया है। स्थानीय निवासी इस प्रशासनिक उपेक्षा से बेहद आक्रोशित हैं और उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही राहत सामग्री और नावों की उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

प्रशासनिक लापरवाही और नाव संचालकों की मनमानी

बाढ़ की इस भीषण आपदा के बीच फैजुल्लागंज के मिल्लत नगर में रहने वाले लोग सरकारी मदद की बाट जोह रहे हैं, लेकिन अब तक कोई अधिकारी सुध लेने नहीं पहुंचा है। राहत सामग्री के अभाव में आम जनता की मजबूरी का फायदा उठाकर कुछ नाव वाले मनमाने पैसे वसूल रहे हैं। स्थानीय निवासी राजा ने बताया कि नाव का एक चक्कर लगाने के बदले 500 रुपये मांगे जा रहे हैं, जिसे चुकाना गरीब परिवारों के लिए नामुमकिन है। प्रशासन की ओर से अब तक किसी भी आधिकारिक नाव का प्रबंध नहीं किया गया है, जिसके कारण लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं। वहीं दूसरी ओर, सहाना बानो जैसे कई निवासी पिछले 15 दिनों से अपने मायके में शरण लेने को विवश हैं। उनकी पूरी दुकान और घर का सामान बाढ़ के पानी में बह चुका है। प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण लोग न केवल आर्थिक तंगी झेल रहे हैं, बल्कि उनके जीवन की बुनियादी जरूरतें जैसे पीने का साफ पानी और सूखा राशन भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। नाव न होने के कारण आपातकालीन स्थिति में भी बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है।

स्थानीय निवासियों का सामूहिक संघर्ष और कच्चा बांध

सरकारी मदद न मिलने पर मिल्लत नगर के लोगों ने खुद ही अपने आशियानों को बचाने का बीड़ा उठाया है। निवासियों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया और बाजार से मिट्टी खरीदी ताकि पानी के बहाव को रोकने के लिए एक कच्चा बांध बनाया जा सके। उनका मानना है कि यदि वे यह सामूहिक प्रयास न करते, तो उनके घर पूरी तरह बाढ़ की भेंट चढ़ जाते। हालांकि, गोमती नदी के उफान और पानी के प्रचंड दबाव के आगे मिट्टी का यह बांध भी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया। पानी गलियों से होता हुआ घरों के भीतर घुस गया और लोगों की बची-खुची संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचाया। यह स्थिति सीतापुर रोड से सटे पूरे इलाके में बेहद नाजुक बनी हुई है। बाढ़ के कारण न केवल लोगों की रोजी-रोटी छिन गई है, बल्कि उनकी गृहस्थी पूरी तरह तबाह हो चुकी है। अब निवासियों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वे कब तक क्षेत्र में राहत सामग्री पहुंचाएंगे और नावों का उचित इंतजाम करेंगे। बिना सरकारी हस्तक्षेप के लोगों का अपने घरों को बचा पाना लगभग असंभव हो गया है और वे लगातार प्रशासन से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज