लखनऊ में बाढ़ का भीषण संकट
लखनऊ जिले में गोमती नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है, जिससे इलाके के निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले छह दिनों से लगातार जारी जलभराव के कारण करीब 40 हजार रिहायशी मकान पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। इन घरों के अंदर पांच फीट तक पानी भरा हुआ है, जिससे लोगों का घर से बाहर निकलना नामुमकिन हो गया है। बख्शी का तालाब क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध चंद्रिका देवी मंदिर भी बाढ़ की चपेट में आ गया है। इस धार्मिक स्थल के चारों तरफ पानी का भराव इतना अधिक है कि वहां तक पहुंचना फिलहाल बहुत कठिन हो गया है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर जाने वाले रास्ते पर कमर तक पानी भरा हुआ है, जिससे भक्तों का आवागमन पूरी तरह ठप पड़ा है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते स्थानीय निवासियों को अपने जरूरी कामों के लिए भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है और प्रशासन की ओर से स्थितियों पर निरंतर नजर रखी जा रही है।
स्थानीय बाजार और मंदिर के हालात
बाढ़ के बढ़ते प्रभाव के कारण लखनऊ के प्रभावित क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां भी पूरी तरह थम गई हैं। चंद्रिका देवी मंदिर के पास स्थित पूरा बाजार पानी के कारण बंद कर दिया गया है। दुकानों के अंदर पानी भरने की वजह से व्यापारियों को अपना सामान सुरक्षित रखने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलस्तर में तेजी आने से रोजमर्रा की वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित हुई है। ड्रोन से ली गई तस्वीरों में भी मंदिर के चारों ओर जलभराव की भयावह स्थिति स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। बाजार बंद होने से आसपास के छोटे दुकानदारों और कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। पानी निकासी के कोई पुख्ता साधन न होने के कारण स्थानीय लोग काफी परेशान हैं। मंदिर प्रबंधन और प्रशासन के लिए यह चुनौती है कि पानी से घिरे इस क्षेत्र को कब तक सामान्य स्थिति में लाया जा सकेगा, क्योंकि वर्तमान में स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है।
2008 के बाद पहली बार गंभीर बाढ़
लखनऊ में गोमती नदी की वर्तमान स्थिति वर्ष 2008 की यादें ताजा कर रही है, जब शहर ने पिछली बार इतनी भयावह बाढ़ का सामना किया था। इतने वर्षों बाद नदी के जलस्तर में हुई भारी वृद्धि ने जिला प्रशासन की तैयारियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आपदा प्रबंधन के अनुसार, नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति काफी जोखिम भरी साबित हो रही है। पिछले छह दिनों की निरंतर बारिश और नदी के बढ़ते दबाव ने निचले इलाकों के बुनियादी ढांचे को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है। यदि जलस्तर कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में और भी अधिक नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोग अब राहत कार्यों की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। शहर के विकास और सुरक्षा की दृष्टि से गोमती का यह रौद्र रूप एक बड़ी चेतावनी है, जिसे देखते हुए भविष्य में जल प्रबंधन की योजनाओं पर पुनर्विचार करने की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है।