फैजुल्लागंज में बाढ़ का भयावह मंजर
लखनऊ के फैजुल्लागंज और दाउदनगर क्षेत्र में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जहाँ करीब 40 हजार से अधिक मकान पानी की चपेट में हैं। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत घर एक-मंजिला हैं, जिसके कारण वहां रहने वाले परिवारों को अपनी छतों पर तिरपाल डालकर दिन काटने पड़ रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से कुल 50 हजार से अधिक घरों में पांच फीट तक पानी जमा हो गया है। पूरे लखनऊ में बाढ़ के कारण चार लाख से ज्यादा की आबादी प्रभावित हुई है। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर नावों का इंतजार कर रहे हैं या घर की सुरक्षा के लिए वहां डटे हुए हैं। अमन वर्मा जैसे निवासी अपने घर की छत पर रहने को मजबूर हैं और उनका मानना है कि नदी के आसपास किए गए निर्माण कार्यों ने इस आपदा को और भी विकराल बना दिया है। लोगों का सारा राशन और घरेलू सामान पानी में बहकर बर्बाद हो गया है।
परेशान परिवारों का दर्द और दांव
बाढ़ के बीच फंसे कई लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर यहां जमीन खरीदी थी। सीतापुर की नगमा खातून दाउदनगर में अपने परिवार के साथ रहती हैं और बाढ़ के कारण अपने बीमार पति और बेटे तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रही हैं। उनका पूरा सामान पानी में तैर रहा है, और उन्हें इस बात का गहरा मलाल है कि उन्होंने ऐसी जगह घर बनाया जहां बाढ़ का खतरा था। इसी तरह हरदोई से आकर बसे सुशील तिवारी ने 2017 में महंगे दाम पर जमीन खरीदकर मकान बनवाया था, जो अब पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे सस्ती जमीन के चक्कर में यहां नहीं आए थे, बल्कि उन्होंने काफी ऊंची कीमतों पर प्लॉट खरीदे थे। दाउदनगर की 60 फिटा रोड पर जमीन की दरें 6 हजार से 8 हजार रुपये प्रति स्क्वायर फीट तक पहुंच चुकी हैं, जबकि अंदरूनी गलियों में भी यह दर 2 से 3 हजार रुपये प्रति स्क्वायर फीट है।
रिवरफ्रंट निर्माण और भविष्य का खतरा
जानकारों के अनुसार, 2018 की एक शोध रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि लखनऊ में रिवरफ्रंट बनाते समय गोमती नदी की चौड़ाई को 450 मीटर से घटाकर 240 मीटर कर दिया गया था। नदी के बहने का प्राकृतिक दायरा भी 250 मीटर से सिमटकर 100 से 125 मीटर तक रह गया है, जिसके दोनों किनारों पर कंक्रीट की दीवारें बना दी गईं। इन कंक्रीट की ऊंची दीवारों के कारण नदी का भारी बहाव आगे नहीं निकल पाया और पानी बैक मारकर रिहायशी इलाकों में भर गया। स्थानीय निवासी मोइनुद्दीन के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब बांध बनाने का ऐलान किया है, जिसे लेकर बिल्डर और प्रॉपर्टी डीलर अपनी जमीन के दाम और बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। प्रोफेसर दत्ता का मानना है कि गोमती नदी की सहायक नदियों को नाला मानकर पाट दिया गया, जिसका परिणाम आज लखनऊ की जनता भुगत रही है। प्रकृति का अपना रास्ता रोकने का यह प्रयास अब शहर के लिए एक बड़ा संकट बन चुका है।