रूरा सुल्तानपुर में कटाव का कहर
लखीमपुर खीरी जनपद के बिजुआ स्थित रूरा सुल्तानपुर गांव में शारदा नदी की लहरें तबाही मचा रही हैं। लंबे समय से कृषि भूमि को अपने आगोश में लेने के बाद अब नदी की धारा सीधे रिहायशी मकानों की नींव तक पहुंच गई है। सोमवार की रात कटाव की गति काफी तेज रही जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई। वर्तमान में करीब तीन रिहायशी मकानों की दहलीज तक पानी की तेज धारा पहुंच चुकी है। गांव वालों के अनुसार पूरी रात नदी का कटाव चलता रहा जिससे ग्रामीणों में भारी दहशत व्याप्त है। लोग अपनी जान बचाने और घरों को बचाने की जद्दोजहद में पूरी रात जागकर गुजारने को मजबूर हैं। यदि नदी की यह विनाशकारी गति मंगलवार को भी जारी रहती है तो इन मकानों के पूरी तरह नदी में समा जाने का गंभीर खतरा बना हुआ है। पूरे गांव में इस स्थिति को लेकर हड़कंप मचा हुआ है और लोग बेहद डरे हुए हैं।
प्रशासनिक उदासीनता से ग्रामीणों में रोष
लगातार बढ़ते जलस्तर और कटाव के कारण रूरा सुल्तानपुर के प्रभावित परिवारों ने अपने घर का सामान बाहर निकालना आरंभ कर दिया है। लोग अपनी जान-माल की सुरक्षा के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन की तैयारी में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों का मुख्य आरोप है कि जिला प्रशासन और बाढ़ खंड विभाग ने इस समस्या को रोकने के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। अधिकारियों की इस कथित उपेक्षा के चलते स्थानीय निवासियों में जबरदस्त आक्रोश पनप रहा है। प्रभावित लोगों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर बोल्डर और मिट्टी की बोरियां लगाने की मांग प्रशासन के समक्ष दोहराई है। उनका कहना है कि अगर समय रहते बचाव कार्य शुरू नहीं किए गए तो कटाव की चपेट में आने से कई और घर धराशायी हो सकते हैं। प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस सुरक्षा प्रबंध न किए जाने के कारण गांव के लोग अपने संसाधनों से ही बचाव का प्रयास कर रहे हैं।
पूरे गांव पर कटाव का मंडराता खतरा
शारदा नदी का जलस्तर पिछले कई दिनों से लगातार ऊंचा बना हुआ है जिससे कटाव की रफ्तार में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। ग्रामीणों को इस बात का गहरा डर सता रहा है कि यदि नदी का यह आक्रामक रुख जल्द नियंत्रित नहीं हुआ तो पूरा गांव ही नदी के अंदर विलीन हो सकता है। यह आपदा कई परिवारों को बेघर करने की कगार पर खड़ी है जिससे आर्थिक और सामाजिक स्तर पर बड़ी क्षति होने की संभावना है। स्थानीय लोग अपनी पुश्तैनी जमीनों और घरों को बचाने के लिए जिला प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं लेकिन बाढ़ खंड विभाग की ओर से अभी तक कोई भी तकनीकी मदद मौके पर नहीं पहुंची है। रात भर जागकर पहरेदारी करना ही इस समय गांव वालों के लिए एकमात्र विकल्प रह गया है। प्रशासनिक स्तर पर बचाव के कार्य कब और किस प्रकार शुरू होंगे, इस पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।