महासभा की मांग और लॉरेंस का समर्थन
बिश्नोई महासभा ने अभिनेता सलमान खान के सामने एक बड़ी शर्त रखी है और कहा है कि यदि अभिनेता समाज से माफी मांग लेते हैं तो इस पर विचार किया जा सकता है। समाज के प्रतिनिधियों ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का खुलकर समर्थन करते हुए यह स्पष्ट किया है कि उसके खिलाफ अभी तक कोई भी अपराध अदालत में सिद्ध नहीं हुआ है। इसी वजह से पूरा समाज उसे अपना हीरो मानता है और उसके साथ मजबूती से खड़ा हुआ है। महासभा के लोगों का यह भी कहना है कि अभिनेता का घमंड ही इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ है जिसे अब समाप्त किया जाना चाहिए। इससे पहले भी लॉरेंस के परिवार के सदस्यों द्वारा इस प्रकार के बयान दिए जा चुके हैं जिनमें सलमान खान को गुरु जम्भेश्वर महाराज की पावन समाधि स्थल पर जाकर माफी मांगने की सलाह दी गई थी। समाज का यह मानना है कि काले हिरण के शिकार की घटना के बाद से ही पूरे देश के बिश्नोई समाज की भावनाएं आहत हुई हैं और उनके भीतर लगातार नाराजगी बनी हुई है। लॉरेंस के शूटरों द्वारा पहले भी इस मामले को लेकर अभिनेता के घर के बाहर फायरिंग की घटनाएं की जा चुकी हैं जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है।
कनाडा में भारतीय युवकों पर हमले
कनाडा की धरती पर इस समय बिश्नोई समुदाय के लोगों को बहुत अधिक प्रताड़ित किया जा रहा है और उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। वैंकूवर शहर में रहने वाले हरियाणा के एक युवक अंकुश बिश्नोई की कार पर अज्ञात लोगों द्वारा हमला किए जाने की ताजा घटना सामने आई है। हमलावरों ने अंकुश की कार की नंबर प्लेट को पूरी तरह मोड़ दिया और उसकी गाड़ी पर कड़े से वार किए। हमलावर युवकों ने उसे सीधे तौर पर लॉरेंस गैंग का सक्रिय सदस्य बताते हुए निशाना बनाया है। कनाडाई पुलिस इस पूरे संवेदनशील मामले में लगातार पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है और उचित कार्रवाई करने से बच रही है। यह गंभीर मामला पूरी तरह से हेट स्पीच और हेट क्राइम की श्रेणी में आता है लेकिन पुलिस ने केवल मामूली मारपीट यानी असॉल्ट के साधारण चार्ज लगाकर खानापूर्ति की है। जब पीड़ित युवक ने पुलिस से इस बारे में सवाल किया तो पुलिस ने अजीब तर्क देते हुए कहा कि उसका नाम एक खास गैंग से मिलता-जुलता है। इसके अलावा स्थानीय पुलिस ने उन हमलावर खालिस्तानी युवकों के नाम तक सार्वजनिक करने से साफ इंकार कर दिया है। कनाडा में केवल बिश्नोई सरनेम होने के कारण एक युवती को नौकरी देने से भी मना कर दिया गया जिससे समुदाय के लोगों में भारी गुस्सा है।
दूतावास की चुप्पी और खौफ का माहौल
कनाडा में रहने वाले हरियाणवी युवक अंकुश बिश्नोई ने स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ भारतीय दूतावास की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अंकुश के अनुसार उन्होंने इस गंभीर घटना की शिकायत तुरंत भारतीय दूतावास में दर्ज कराई थी लेकिन वहां से उन्हें कोई भी ठोस जवाब नहीं मिला है। स्थानीय सांसद प्रदीप सराय को इस मामले के संबंध में ईमेल भेजे हुए पूरे दो हफ्ते का समय बीत चुका है लेकिन उनकी तरफ से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ग्राउंड पर स्थिति इतनी ज्यादा खराब है कि आम लोग गहरे खौफ के साए में अपना जीवन जीने को मजबूर हैं। कुछ लोग जबरन वीडियो बनवाकर यह दावा करते हैं कि सब कुछ ठीक है जबकि हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है और डर का माहौल कायम है। कनाडाई धरती पर खालिस्तानी समर्थक लगातार बिश्नोई समाज के लोगों को निशाना बना रहे हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की नौकरी नहीं दी जा रही है। इन तमाम घटनाओं और विदेश में समुदाय के लोगों पर हो रहे लगातार हमलों के कारण ही लॉरेंस गैंग के पक्ष में लोगों की नाराजगी और समर्थन दोनों तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। समाज के लोग अपनी पहचान और सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं।