नवरात्रि के पहले दिन मंदिर के कपाट बंद
लखनऊ के प्रसिद्ध मां चंद्रिका देवी धाम में शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व के पहले दिन श्रद्धालुओं को मायूसी हाथ लगी है। इस धार्मिक स्थल के कपाट आज पूरी तरह से बंद रखे गए हैं, जिससे भक्त यहां दर्शन करने के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं। मुख्य द्वार पर ताले लटकने के कारण दूर-दराज से आए दर्शनार्थियों को बिना पूजा-अर्चना किए ही वापस लौटने को मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति तब बनी है जब नवरात्रि जैसे बड़े धार्मिक अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन हेतु आते हैं। मंदिर परिसर के चारों ओर बाढ़ का पानी भर जाने के कारण सुरक्षा के लिहाज से यह कड़ा कदम उठाया गया है। सुबह से ही दर्शन की उम्मीद में पहुंच रहे भक्तों के लिए मंदिर प्रशासन की तरफ से दर्शन करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। पूरी तरह से जलमग्न होने के कारण यह ऐतिहासिक स्थल वर्तमान में भक्तों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र में तब्दील हो गया है।
गोमती नदी की बाढ़ का कहर
मंदिर परिसर के भीतर पानी का यह संकट अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि पिछले कई दिनों से हालात बिगड़ते जा रहे थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह लगातार 10वां दिन है जब मंदिर के आंगन और आसपास के रास्तों पर गोमती नदी का बाढ़ का पानी जमा है। इस भयावह स्थिति के चलते मंदिर के अंदर जाने के सभी रास्ते पानी से घिरे हुए हैं, जिससे भक्तों का प्रवेश करना पूरी तरह से जोखिम भरा हो गया है। नदी का जलस्तर घटने का नाम नहीं ले रहा है, जिसके कारण प्रबंधन को नवरात्रि के महत्वपूर्ण दिन भी मंदिर को बंद रखने का कठिन निर्णय लेना पड़ा है। हालांकि मंदिर के भीतर की स्थिति की भयावहता का अंदाजा ऊपर दिए गए ड्रोन वीडियो से लगाया जा सकता है। वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि मंदिर का कितना हिस्सा पूरी तरह से बाढ़ के पानी की चपेट में आ चुका है और वहां की स्थिति कितनी गंभीर बनी हुई है।
300 साल पुराने मंदिर का इतिहास और वर्तमान संकट
मां चंद्रिका देवी धाम का इतिहास लगभग 300 वर्ष पुराना माना जाता है और यह लखनऊ के सबसे श्रद्धापूर्ण स्थलों में से एक है। अपनी लंबी धार्मिक विरासत और भक्तों की अटूट आस्था के बावजूद, पहली बार शारदीय नवरात्रि के मौके पर इस प्रकार मंदिर को पूरी तरह से बंद करने की नौबत आई है। आमतौर पर नवरात्रि के पहले दिन यहां भक्तों का सैलाब उमड़ता है, लेकिन इस बार गोमती नदी की बाढ़ ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया है। मंदिर की ऐतिहासिक बनावट और परिसर में भरे पानी ने स्थानीय लोगों के लिए चिंता बढ़ा दी है। भक्तों को इस बात का गहरा दुख है कि वे इस शुभ अवसर पर माता की प्रतिमा के समक्ष अपनी हाजिरी नहीं लगा पा रहे हैं। फिलहाल, मंदिर के कपाट कब खुलेंगे, इस पर कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है क्योंकि सब कुछ नदी के जलस्तर के नीचे जाने पर निर्भर करता है। स्थिति का जायजा लेने के लिए ड्रोन कैमरों का सहारा लिया जा रहा है ताकि आसपास के हालात की सटीक जानकारी मिल सके।