नौरादेही में चीतों के आगमन की तैयारी
मध्य प्रदेश में चीता परियोजना का विस्तार करते हुए सरकार ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को तीसरा बड़ा केंद्र घोषित किया है। चीता स्टीयरिंग कमेटी ने यहाँ चार चीतों को बसाने की अनुमति प्रदान कर दी है, जिसकी शुरुआत 7 अक्टूबर से होगी। इस विशेष दिन पर कूनो नेशनल पार्क से नर चीता थोलो और मादा चीता सीसीबी-3 को यहाँ लाया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं इन दो चीतों को रिहा करने के कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। यह दिन प्रदेश के लिए ऐतिहासिक है क्योंकि इसी तिथि पर नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में निरंतर 25 वर्षों का कार्यकाल पूर्ण हो रहा है। नौरादेही का चयन विस्तृत और अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए किया गया है। यहाँ के खुले जंगल और घास के मैदान चीतों के प्राकृतिक आवास के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं। अब तक केवल कूनो और गांधी सागर ही चीतों के घर थे, लेकिन अब नौरादेही के जुड़ने से प्रदेश में चीतों के लिए तीन सुरक्षित ठिकाने बन गए हैं। इस प्रक्रिया से राज्य में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में नई उम्मीदें जगी हैं।
सुरक्षा और प्रबंधन का पुख्ता इंतजाम
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों के लिए बेहद सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। यह टाइगर रिजर्व कुल 2,340 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्रफल में फैला हुआ है, जो इसे मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बनाता है। चीतों को शुरुआती दौर में 439 हेक्टेयर के एक विशेष सॉफ्ट रिलीज बोमा में रखा जाएगा, जिसका आकार भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क के बराबर है। सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस बाड़े को पांच अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है, जहाँ पावर फेंसिंग लगाई गई है। चीतों की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए 24 घंटे ट्रैकिंग की अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यह इलाका नर्मदा, बेतवा और केन नदियों के कैचमेंट क्षेत्र में आता है, जिससे यहाँ जल और हरियाली की प्रचुर उपलब्धता है। सीसीबी-3 जो कि गांधी सागर में रहने वाली राधा की बहन है, उसे नौरादेही के इस नए वातावरण में ढलने के लिए विशेषज्ञों की देखरेख में रखा जाएगा। सुरक्षा और स्वास्थ्य निगरानी के लिए वन विभाग की विशेष टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि चीतों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें खुले वातावरण में सुरक्षित महसूस कराया जा सके।
परियोजना का महत्व और भविष्य की राह
चीतों के पुनर्वास की यह परियोजना न केवल प्रदेश की पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश के वन्यजीव इतिहास में एक नया अध्याय भी है। पहले चीतों को गुजरात के बन्नी ग्रासलैंड में बसाने का विचार चल रहा था, लेकिन अब प्राथमिकता के आधार पर नौरादेही के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को विकसित किया गया है। यद्यपि गुजरात के बन्नी क्षेत्र में चीतों को बसाने की तैयारी अभी भी जारी है, परंतु वहां किसी भी प्रकार की रिलीज की तारीख अभी निर्धारित नहीं की गई है। नौरादेही का चयन लंबी प्रक्रिया के बाद किया गया है ताकि चीतों के कुनबे को बुंदेलखंड के क्षेत्र तक विस्तारित किया जा सके। चीता स्टीयरिंग कमेटी और वन विभाग की योजना के अनुसार 7 अक्टूबर को पहला जोड़ा पहुँचने के बाद शेष चीतों को लाने की प्रक्रिया बाद के चरणों में पूरी की जाएगी। इस कदम का मुख्य लक्ष्य चीतों की जनसंख्या को सुरक्षित रखना और उन्हें प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण करने का मौका देना है। मध्य प्रदेश में चीतों की संख्या बढ़ने से न केवल जैव विविधता में सुधार होगा, बल्कि इस क्षेत्र में पर्यटन और शोध के भी नए अवसर सृजित होंगे। यह परियोजना भारत सरकार की उन प्राथमिकताओं का हिस्सा है जिसके तहत लुप्तप्राय प्रजातियों के पुनरुद्धार पर विशेष बल दिया जा रहा है।