रंगोली और पोस्टरों के जरिए विद्यार्थियों की अनूठी प्रस्तुति विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर निभेड़ा स्थित विद्यालय परिसर के भीतर विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक कला का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। इस विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूल के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न प्रकार की रंगोली सजाई और आकर्षक पोस्टर तैयार किए जिनके माध्यम से ओजोन परत के महत्व को बेहद सरल और प्रभावी ढंग से समझाया गया। इन कलाकृतियों में पृथ्वी की रक्षा करने वाले सुरक्षा कवच यानी ओजोन परत को बचाने का स्पष्ट संदेश दिया गया था। स्कूल के कमरों और मैदानों में बनाई गई इन रंगोलियों में पराबैंगनी किरणों के दुष्प्रभावों और उनसे बचने के उपायों को रंगों के माध्यम से उकेरा गया था। शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन ने बच्चों के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की रचनात्मक गतिविधियों से न केवल बच्चों की कलात्मक प्रतिभा निखरती है बल्कि उनके भीतर पर्यावरण के प्रति एक गहरी संवेदनशीलता भी विकसित होती है जो भविष्य के लिए बहुत आवश्यक है।
ओजोन परत का महत्व और हमारे पर्यावरण पर उसका व्यापक असर हमारी पृथ्वी के वायुमंडल में समताप मंडल के भीतर पाई जाने वाली ओजोन गैस की यह परत सूर्य की ओर से आने वाली बेहद खतरनाक और हानिकारक पराबैंगनी किरणों को सीधे धरती पर पहुंचने से रोकने का महान कार्य करती है। यदि यह सुरक्षा कवच कमजोर पड़ जाए या इसमें लगातार क्षरण होता रहे तो मानवता और संपूर्ण जीव जगत के सामने गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकते हैं जिनमें त्वचा का कैंसर और आंखों की बीमारियां प्रमुख रूप से शामिल हैं। आधुनिक युग में औद्योगिकीकरण और प्रदूषण के कारण जिस प्रकार लगातार पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है, उसे देखते हुए इस प्रकार के जागरूकता अभियानों की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है। शिक्षण संस्थानों में जब युवा पीढ़ी को इन वैज्ञानिक और पर्यावरणीय सत्यों से अवगत कराया जाता है, तो वे घर-परिवार और समाज में जाकर अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने का दायित्व निभाते हैं। इस प्रकार के आयोजनों से समाज के भीतर एक सामूहिक चेतना जागृत होती है जो अंततः हमारे प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण को बचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भविष्य की कार्ययोजना और समुदाय स्तर पर जागरूकता का विस्तार विद्यालय स्तर पर आयोजित किए गए इन जागरूकता कार्यक्रमों के समापन समारोह में शिक्षकों और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने आने वाले दिनों में और भी व्यापक स्तर पर अभियान चलाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि केवल एक दिन विशेष पर औपचारिकता निभाने के बजाय हमें अपने दैनिक जीवन की दिनचर्या में ऐसे बदलाव करने होंगे जो पर्यावरण के अनुकूल हों और ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों के प्रयोग को कम करें। इसके तहत प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचने, पेड़ों की कटाई रोकने और अधिक से अधिक पौधे लगाने जैसे रचनात्मक कदमों पर विशेष बल दिया गया। स्कूल प्रशासन ने योजना बनाई है कि आने वाले महीनों में छात्रों के लिए वाद-विवाद प्रतियोगिताओं और निबंध लेखन सत्रों का भी आयोजन किया जाएगा ताकि पर्यावरण विज्ञान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर उनकी समझ को और अधिक मजबूत किया जा सके। इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य यही है कि बच्चे किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर व्यावहारिक जीवन में भी प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी के साथ पालन करें और एक जिम्मेदार नागरिक बनकर उभरें।