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ऑनलाइन रजिस्ट्री भुगतान: गोरखपुर में तकनीकी समस्याओं के निपटारे के लिए एसबीआई से करार

गोरखपुर में संपत्ति पंजीकरण के दौरान ऑनलाइन भुगतान फंसने की समस्या खत्म होगी। रजिस्ट्री विभाग ने इस चुनौती के समाधान के लिए भारतीय स्टेट बैंक के साथ अनुबंध किया है।

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Ankit Yadav
03 अक्ट 2026, 17:33
ऑनलाइन रजिस्ट्री भुगतान: गोरखपुर में तकनीकी समस्याओं के निपटारे के लिए एसबीआई से करार

पंजीकरण में तकनीकी खामियों से मुक्ति

गोरखपुर जिले के संपत्ति खरीदारों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत भरी खबर सामने आई है। अब तक ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्री शुल्क जमा करते समय अक्सर ट्रांजेक्शन के बीच में ही अटक जाने की शिकायतें मिल रही थीं। इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण कई बार नागरिकों के बैंक खाते से पैसे कट जाते थे, लेकिन रजिस्ट्री विभाग के पोर्टल पर रसीद जेनरेट नहीं होती थी। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को दोबारा भुगतान करना पड़ता था, जबकि फंसी हुई पुरानी धनराशि की वापसी में भी भारी देरी का सामना करना पड़ता था। जिले की सात तहसीलों के अंतर्गत आने वाले आठ सब रजिस्ट्रार कार्यालयों से हर महीने लगभग 20 से 25 मामले ट्रांजेक्शन फेल होने के रिपोर्ट किए जा रहे हैं। अकेले तहसील सदर में ही प्रतिमाह 8 से 10 शिकायतें इस प्रकार की दर्ज की जा रही हैं। पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी शुल्क अटक जाने से रजिस्ट्री के काम में काफी व्यवधान आ रहा है और लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

एसबीआई के साथ नया अनुबंध और प्रक्रिया

रजिस्ट्री विभाग ने इस समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक के साथ एक एमओयू यानी अनुबंध हस्ताक्षरित किया है। अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद राजकोष के बजाए सीधे बैंक के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया संपन्न होगी। इस बदलाव के बाद ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में आ रही तकनीकी बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी। अधिवक्ता महेंद्र मणि त्रिपाठी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि छह महीने पूर्व उनके मुवक्किल के 33 हजार रुपये ट्रांजेक्शन में फंस गए थे। उन्होंने ट्रांजेक्शन की विस्तृत जानकारी, आधार कार्ड, पैन कार्ड और नोटरी चालान के साथ शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक उन्हें रिफंड नहीं मिल पाया है। वहीं, अधिवक्ता बीके मल्ल का कहना है कि उनके एक मुवक्किल के 41 हजार रुपये इसी तरह अटक गए थे, जिन्हें काफी मशक्कत के बाद खाते में वापस प्राप्त किया जा सका। इन अधिवक्ताओं का मानना है कि विभागीय स्तर पर यह पहल निश्चित रूप से रजिस्ट्री की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व सुगम बनाएगी।

भविष्य की व्यवस्था और समाधान का असर

संपत्ति पंजीकरण के इस नए डिजिटल ढांचे के लागू होने के बाद रजिस्ट्री विभाग की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव दिखेगा। नई प्रणाली से न केवल ट्रांजेक्शन फेल होने की दर कम होगी बल्कि भुगतान की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी। अधिवक्ता रवि प्रकाश श्रीवास्तव ने इस सरकारी पहल की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित इस समस्या का समाधान होना बेहद जरूरी था। वर्तमान में अधिकांश लोग जब भुगतान में त्रुटि पाते हैं, तो वे अपनी रजिस्ट्री की फाइल आगे बढ़ाने के लिए दूसरी बार पूरा शुल्क जमा करने को मजबूर होते हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है बल्कि रजिस्ट्री का काम भी पेंडिंग हो जाता है। आगामी समय में पूरी प्रक्रिया के बैंक के माध्यम से संचालित होने से राजकोषीय दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। विभाग का दावा है कि नई व्यवस्था के क्रियान्वयन के बाद रजिस्ट्री से जुड़ी इन तकनीकी समस्याओं का स्थायी समाधान हो जाएगा। यह कदम उन आम लोगों के लिए बड़ी राहत होगा जो पंजीकरण के दौरान अपनी मेहनत की कमाई फंस जाने से परेशान रहते हैं।

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