पूर्व फौजी की गुवाहाटी में गिरफ्तारी
भारतीय सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पड़ोसी देश पाकिस्तान को मुहैया कराने के गंभीर आरोप में बेगूसराय के एक रिटायर्ड जवान को हिरासत में लिया गया है। इस संदिग्ध गतिविधि में शामिल आरोपी की पहचान बरौनी थाना इलाके के पपरौर गांव निवासी 39 वर्षीय रितेश कुमार के रूप में हुई है। असम पुलिस के विशेष कार्य बल ने गुवाहाटी के सातगांव इलाके से इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुट गई हैं कि आखिर किस प्रकार की खुफिया सूचनाएं साझा की गई थीं। प्राथमिक पड़ताल के अनुसार, आरोपी रिटायरमेंट के बाद से ही अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गुवाहाटी में निवास कर रहा था। वहां उसने अपने परिचितों और परिवारजनों को यह बताया था कि वह असम सचिवालय में कार्य कर रहा है। सुरक्षा एजेंसियां अब उसके नेटवर्क और उन पाकिस्तानी हैंडलर्स की पहचान करने में लगी हैं जिनके संपर्क में वह कथित तौर पर बना हुआ था। यह गिरफ्तारी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करती है जिसकी जांच निरंतर जारी है।
आरोपी की पृष्ठभूमि और जांच का दायरा
गिरफ्तार रितेश कुमार वर्ष 2006 में भारतीय थल सेना में भर्ती हुआ था और करीब 17 वर्षों की लंबी सेवा देने के उपरांत 2023 में वह सेवानिवृत्त हुआ। उसके पिता अशोक सिंह ने अपने बेटे पर लगे इन गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनका पुत्र मातृभूमि के साथ कभी गद्दारी नहीं कर सकता। वर्तमान में जांच एजेंसियां इस बात की गहन समीक्षा कर रही हैं कि सेना के गोपनीय दस्तावेज या इनपुट्स किन माध्यमों से सीमा पार भेजे गए थे। इस प्रकरण में पूर्वी चंपारण के अभिषेक कुमार सिंह की गिरफ्तारी भी एक अहम कड़ी मानी जा रही है। अभिषेक के पिता स्वयं सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार हैं और अब पुलिस उन दोनों के आपसी संबंधों की बारीकी से छानबीन कर रही है। मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक ने भी अभिषेक की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि स्थानीय स्तर पर भी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जांच दल इस बात का विश्लेषण कर रहे हैं कि ये दोनों आरोपी अलग-अलग घटनाओं में शामिल हैं या फिर इनके बीच कोई बड़ा साठ-गांठ वाला नेटवर्क काम कर रहा था।
सुरक्षा एजेंसियों की अगली कार्रवाई
जासूसी के इस हाई-प्रोफाइल मामले ने पूरे बेगूसराय और आसपास के क्षेत्रों में खलबली मचा दी है। रितेश कुमार करीब तीन महीने पहले ही अपने परिवार के साथ पैतृक गांव पपरौर आया था और कुछ दिन रुकने के पश्चात वापस गुवाहाटी चला गया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद से ही स्थानीय पुलिस भी अलर्ट मोड पर है और उसके गांव के संपर्कों के साथ-साथ उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि की भी जांच कर रही है। हालांकि, रितेश और अभिषेक पर लगे ये आरोप अभी केवल जांच के दायरे में हैं और इन्हें अदालत में सिद्ध किया जाना बाकी है। जांच एजेंसियों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती इस पूरे जासूसी तंत्र के मूल तक पहुंचना और इसमें शामिल अन्य संदिग्धों का पता लगाना है। पाकिस्तान कनेक्शन को लेकर सुरक्षा महकमे काफी सख्त हैं और इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जा रही है। भविष्य में मिलने वाले इनपुट और पूछताछ से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि सेना के कितने महत्वपूर्ण रहस्यों को इन लोगों ने दुश्मन देश तक पहुंचाया था। पूरे मामले की मॉनिटरिंग केंद्रीय एजेंसियों द्वारा भी की जा रही है ताकि सुरक्षा चूक की जड़ों को पूरी तरह से नष्ट किया जा सके।