प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों पर निशुल्क प्रवेश विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में घूमने के शौकीनों के लिए एक बहुत ही शानदार और आकर्षक सौगात का ऐलान किया गया है जिसके तहत आज के दिन इतिहास और वास्तुकला के प्रमुख केंद्रों पर किसी भी प्रकार का प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस विशेष व्यवस्था के अंतर्गत राजधानी जयपुर के विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक आमेर महल के साथ-साथ पर्यटकों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय खगोलीय वेधशाला जंतर मंतर पर भी आगंतुक बिना किसी टिकट के सीधे प्रवेश पा सकेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक संख्या में लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इस घोषणा के बाद से ही विभिन्न ऐतिहासिक धरोहरों और स्मारकों के बाहर सुबह से ही पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों की अच्छी खासी आवाजाही और भीड़ देखने को मिल रही है। टिकट खिड़कियां बंद रहने और प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क होने के कारण लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ बड़ी संख्या में इन प्राचीन स्थलों का दीदार करने पहुंच रहे हैं। पुरातत्व और संग्रहालय विभाग द्वारा उठाये गए इस कदम से देश के कोने-कोने से जयपुर पहुंचे सैलानियों में जबरदस्त उत्साह का माहौल बना हुआ है और वे इस ऐतिहासिक व्यवस्था का भरपूर आनंद उठा रहे हैं।
पर्यटन को बढ़ावा देने की विशेष पहल इस प्रकार के आयोजनों के पीछे मुख्य उद्देश्य ऐतिहासिक विरासतों के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना और सांस्कृतिक पर्यटन को प्रोत्साहित करना होता है ताकि अधिक लोग देश के प्राचीन इतिहास को समझ सकें। भारतीय संस्कृति और वास्तुकला का अध्ययन करने वाले छात्रों, शोधकर्ताओं और आम पर्यटकों के लिए ऐसे विशेष अवसरों का बहुत अधिक महत्व होता है क्योंकि इससे उन्हें बिना किसी आर्थिक बाधा के स्मारकों के करीब जाने का मौका मिलता है। राज्य सरकारों और पर्यटन विभागों द्वारा दुनिया भर में इस दिन विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और मेलों का आयोजन किया जाता है ताकि स्थानीय आतिथ्य सत्कार और हस्तशिल्प कला को भी एक नया वैश्विक मंच मिल सके। इस प्रकार की व्यवस्थाओं से न केवल ऐतिहासिक महत्व की इमारतों के संरक्षण के प्रति लोगों की जिम्मेदारी बढ़ती है बल्कि राज्य की आर्थिकी में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले पर्यटन उद्योग को भी एक नई गति और ऊर्जा प्राप्त होती है। सरकारें और स्थानीय प्रशासन हमेशा से इस बात पर जोर देते आए हैं कि आम नागरिकों को उनकी अपनी धरोहरों के साथ जोड़ा जाए ताकि ऐतिहासिक स्मारकों का संवर्धन और संरक्षण बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सके और आने वाली पीढ़ियां अपनी गौरवशाली परंपराओं से भली-भांति परिचित हो सकें।
आगामी पर्यटन सीजन पर सकारात्मक प्रभाव इस प्रकार के विशेष और जनहितैषी निर्णयों से आने वाले मुख्य पर्यटन सीजन के दौरान आगंतुकों की संख्या में भारी वृद्धि होने की मजबूत उम्मीद जताई जा रही है जिससे स्थानीय कारोबारियों और होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। पर्यटन से जुड़े गाइड, हस्तशिल्प विक्रेता, टैक्सी चालक और छोटे दुकानदारों के लिए यह समय व्यापार को गति देने का एक बेहतरीन अवसर साबित होता है जब अधिक संख्या में सैलानी ऐतिहासिक स्थलों का रुख करते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की छूट मिलने से लोग भविष्य में भी इन स्थलों का बार-बार दौरा करने के लिए प्रेरित होंगे और अपने परिचितों को भी यहां आने की सलाह देंगे जिससे पर्यटन को दीर्घकालिक लाभ पहुंचेगा। इस सफल आयोजन के बाद से पर्यटन विभाग भविष्य में भी ऐसे ही कुछ और विशेष अवसरों पर प्रवेश शुल्क में छूट या विशेष रियायतें देने की संभावनाओं पर विचार कर सकता है ताकि राज्य में आने वाले हर पर्यटक को एक यादगार और सुखद अनुभव प्राप्त हो सके। कुल मिलाकर विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर दी गई यह सौगात राज्य के पर्यटन मानचित्र पर अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत करने में मील का पत्थर साबित हो रही है और सभी संबंधित पक्षों द्वारा इसका स्वागत किया जा रहा है।