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पर्यटन का नया केंद्र: भेड़ाघाट और लम्हेटाघाट में बनेगा भव्य जियो पार्क और जियोलॉजिक म्यूजियम

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शुमार भेड़ाघाट और लम्हेटाघाट क्षेत्र में भूगर्भीय धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। यहाँ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से एक आधुनिक जियो पार्क और जियोलॉजिक म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा। इस नई पहल से राज्य के पर्यटन मानचित्र पर इस क्षेत्र का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा।

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Ankit Yadav
28 सित 2026, 16:53
पर्यटन का नया केंद्र: भेड़ाघाट और लम्हेटाघाट में बनेगा भव्य जियो पार्क और जियोलॉजिक म्यूजियम

भेड़ाघाट और लम्हेटाघाट में भूगर्भीय धरोहर का विकास मध्य प्रदेश के प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध इलाकों में शुमार भेड़ाघाट तथा लम्हेटाघाट में अब पर्यटकों के लिए एक और बड़ा आकर्षण जुड़ने जा रहा है। प्राप्त विवरण के अनुसार इस संपूर्ण भूभाग पर एक अत्याधुनिक जियो पार्क और एक विशेष जियोलॉजिक म्यूजियम स्थापित करने की योजना पर काम शुरू हो रहा है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की अनूठी भौगोलिक संरचनाओं और प्राचीन अवशेषों को सहेजना तथा आने वाले पर्यटकों को उनके वैज्ञानिक महत्व से परिचित कराना है। नर्मदा नदी के तट पर स्थित इन क्षेत्रों में प्रागैतिहासिक काल के कई महत्वपूर्ण साक्ष्य पहले भी मिलते रहे हैं, जिन्हें अब एक व्यवस्थित संग्रहालय के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इस योजना के मूर्त रूप लेने से न केवल स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि देश और दुनिया के भू-वैज्ञानिकों तथा शोधकर्ताओं के लिए भी यह स्थान अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र बन जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस अनूठी सौगात से राज्य में आने वाले सैलानियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाएगी और यहाँ की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी एक नई गति प्राप्त होगी।

प्राचीन इतिहास और वैज्ञानिक महत्व का अनूठा संगम लम्हेटाघाट और उसके आसपास के भूभाग का भूगर्भीय इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध रहा है, जहाँ अतीत के गर्भ में छिपे कई रहस्य आज भी वैज्ञानिकों को आकर्षित करते हैं। ऐसे क्षेत्रों में जियो पार्क की स्थापना करने से आम जनता को पृथ्वी के विकास क्रम और प्राचीन जीवों के जीवाश्मों के बारे में बहुत नजदीक से जानने का अवसर मिलता है। सामान्य तौर पर ऐसे संग्रहालयों और पार्कों में क्षेत्रीय स्तर पर मिलने वाली चट्टानों, खनिजों, प्राचीन जीवों के अवशेषों और भौगोलिक उथल-पुथल के साक्ष्यों को बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जाता है ताकि स्कूली छात्रों से लेकर शोधार्थियों तक सभी इसका लाभ उठा सकें। मध्य प्रदेश सरकार और संबंधित पर्यटन विभाग इस प्रकार की पहलों के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं। इस परियोजना के आने से न केवल इस क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता को एक वैज्ञानिक आधार मिलेगा, बल्कि यह स्थान शैक्षिक पर्यटन के लिहाज से भी देश के नक्शे पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में स्थापित हो जाएगा। संग्रहालय के भीतर अत्याधुनिक प्रदर्शन तकनीकों का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है ताकि आगंतुकों को प्राचीन काल की एक स्पष्ट और सजीव झांकी देखने को मिल सके।

पर्यटन को बढ़ावा और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद इस महत्वाकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद मध्य प्रदेश के पर्यटन उद्योग को एक अभूतपूर्व विस्तार मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है। जब किसी विशेष क्षेत्र में इस स्तर के संग्रहालय और पार्क विकसित किए जाते हैं, तो वहाँ केवल सामान्य सैलानी ही नहीं बल्कि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोग भी बड़ी संख्या में आकर्षित होते हैं। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय व्यापार, होटल व्यवसाय, परिवहन सेवाओं और हस्तशिल्प बाजार को सीधा लाभ पहुंचता है, जिससे क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलते हैं। राज्य प्रशासन और पर्यटन बोर्ड इस बात पर विशेष ध्यान दे रहे हैं कि निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण और प्राकृतिक सौंदर्य को किसी भी प्रकार की हानि न पहुंचे, ताकि भेड़ाघाट की मूल खूबसूरती पूरी तरह से सुरक्षित बनी रहे। आने वाले दिनों में इस योजना की प्रगति के साथ ही यहाँ आगंतुकों के लिए बुनियादी सुविधाओं को भी और अधिक उन्नत बनाने पर जोर दिया जाएगा। इस प्रकार के दीर्घकालिक विकास कार्यों से राज्य के समग्र आर्थिक विकास में सकारात्मक योगदान मिलता है और देश के पर्यटन मानचित्र पर प्रदेश की स्थिति और अधिक मजबूत होती है।

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