पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं का शानदार प्रदर्शन छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध और पारंपरिक त्योहार पोला के पावन अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में विशेष आयोजनों का सिलसिला देखने को मिला जिसमें स्थानीय महिलाओं ने बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान आयोजित की गई खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं और युवतियों ने अपनी खेल प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इस प्रकार के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल की संस्कृति को सहेजना और महिलाओं को अपनी छिपी हुई कला तथा प्रतिभा को खुलकर प्रदर्शित करने के लिए एक उचित मंच प्रदान करना था। मैदान पर नजर आ रहे उत्साह और उमंग ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस तरह के पारंपरिक उत्सव न केवल मनोरंजन का साधन बनते हैं बल्कि समाज को एकजुट करने में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। खेल के दौरान सभी प्रतिभागियों ने खेल भावना का परिचय देते हुए एक-दूसरे का उत्साहवर्धन किया और इस पर्व को यादगार बना दिया।
सांसद ने की पर्व की सराहना और बहनों की खुशहाली का जिक्र कार्यक्रम के दौरान उपस्थित गणमान्य अतिथियों और क्षेत्र के सांसद ने इस अनूठे आयोजन की भरपूर सराहना करते हुए अपने विचार साझा किए। उन्होंने अपने संबोधन में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि पोला का यह महत्वपूर्ण पर्व केवल कृषि और गोधन की पूजा तक सीमित नहीं है बल्कि यह हमारी संस्कृति में बहनों की खुशहाली और उनके कल्याण का भी एक बहुत बड़ा उत्सव है। सांसद महोदय ने कहा कि जब समाज की महिलाएं और बहनें इस प्रकार के आयोजनों में खुलकर हिस्सा लेती हैं और अपनी कला का प्रदर्शन करती हैं तो इससे पूरे क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस तरह के सांस्कृतिक और पारंपरिक पर्व हमारे प्राचीन मूल्यों को संजोए रखने के साथ-साथ वर्तमान पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का कार्य भी बखूबी करते हैं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा इस प्रकार के आयोजनों को लगातार बढ़ावा दिए जाने से स्थानीय निवासियों में भी काफी उत्साह देखने को मिलता है और वे बढ़-चढ़कर इन गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
संस्कृति और महिला सशक्तिकरण का अनूठा संगम आने वाले दिनों में इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण को और अधिक गति मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर हो रहे ऐसे आयोजनों से न केवल महिलाओं का आश्वस्त और आत्मनिर्भर होना तय होता है बल्कि हमारी प्राचीन लोक संस्कृति भी सुरक्षित रहती है। इस सफल आयोजन के बाद से ही क्षेत्र के लोगों में इस बात की चर्चा है कि भविष्य में भी इस प्रकार की खेलकूद प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला लगातार जारी रहना चाहिए ताकि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से रूबरू कराया जा सके। इस पूरे घटनाक्रम और उत्सव ने यह साबित कर दिया है कि जब समाज के सभी वर्ग मिलकर किसी पर्व को मनाते हैं तो उसकी भव्यता और महत्व दोनों कई गुना बढ़ जाते हैं। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि ऐसे आयोजनों से सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलता है और आपसी भाई-चारा हमेशा के लिए मजबूत होता है।