सदर अस्पताल में प्रसव के दौरान महिला की मृत्यु और हंगामा
समस्तीपुर सदर अस्पताल परिसर में उस समय भारी अफरातफरी और तनाव का माहौल बन गया जब प्रसव के लिए लाई गई लालती कुमारी नामक महिला की मौत हो गई। मृतका की तीन बेटियां हैं और इस अचानक हुई घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अस्पताल के भीतर कोहराम मचते ही बड़ी संख्या में लोग और परिजन एकत्र हो गए। हालात बिगड़ते देख अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई और वहां मौजूद लोगों ने जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्था की लचर कार्यशैली के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। इस हंगामे की गूंज पूरे अस्पताल परिसर में फैल गई और हर तरफ चीख-पुकार के साथ प्रशासन विरोधी माहौल बन गया। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आ गई और अविलंब हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस बल को मौके पर रवाना किया गया ताकि किसी भी बड़ी अप्रिय घटना को समय रहते टाला जा सके।
पुलिस दल की मौजूदगी और परिजनों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप
घटना की भनक लगते ही नगर थाना के प्रभारी अजीत कुमार अपने सुरक्षा बलों के साथ और आपातकालीन सेवा प्रदाता डायल 112 की टीम तुरंत सदर अस्पताल पहुंच गई। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और उग्र भीड़ को शांत कराने का प्रयास किया। मृतका की सास जगमाया देवी ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि अस्पताल के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने महिला की मौत होने के बाद उसके शव को एक एंबुलेंस में लादकर चुपचाप किसी निजी नर्सिंग होम भिजवा दिया था। उनके मुताबिक उस एंबुलेंस का चालक मृत महिला को एक-दो अलग-अलग निजी चिकित्सालयों में लेकर गया जहाँ डॉक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन उसी शव को लेकर वापस सदर अस्पताल पहुंचे और विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया। पुलिस बल ने आक्रोशित परिवार के सदस्यों को बहुत समझाया-बुझाया और किसी तरह उनका गुस्सा शांत किया जिसके बाद वे शव को लेकर अपने घर चले गए।
चिकित्सकीय बयान और मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही
अस्पताल के प्रतिनिधि गिरीश कुमार ने इस मामले पर सफाई देते हुए बताया कि महिला को प्रसव कराने के उद्देश्य से ही सदर अस्पताल लाया गया था। चिकित्सा जांच की प्रक्रिया के दौरान महिला को अत्यधिक रक्तस्राव यानी ब्लीडिंग होने लगी थी जिसके कारण उसे बेहतर इलाज के लिए तुरंत अन्यत्र रेफर कर दिया गया था। मरीज के परिजन काफी देर बीत जाने के बाद उसे अस्पताल परिसर से बाहर लेकर निकले थे जिसके कुछ समय बाद ही महिला की मौत होने की दुखद सूचना प्राप्त हुई। स्वजनों द्वारा किए जा रहे हंगामे की खबर मिलते ही अस्पताल प्रबंधन ने खुद नगर थाना की पुलिस को सूचित किया था जिसने आकर मामले को शांत कराया। नगर थानाध्यक्ष अजीत कुमार ने स्पष्ट किया है कि पीड़ित परिवार की तरफ से अभी तक कोई लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। जैसे ही पीड़ित पक्ष की ओर से लिखित शिकायत या आवेदन मिलेगा, पुलिस इस पूरे मामले में नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेगी।