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प्रशासनिक लापरवाही: दो साल बीतने के बाद भी मंडी में पब्लिक हेल्थ लैब का निर्माण अधूरा

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई पब्लिक हेल्थ लैब की परियोजना प्रशासनिक सुस्ती का शिकार हो गई है। दो साल से अधिक का समय गुजर जाने के बावजूद इस महत्वपूर्ण प्रयोगशाला का काम पूरा नहीं हो सका है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी निराशा का माहौल है।

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Ankit Yadav
24 सित 2026, 11:36
प्रशासनिक लापरवाही: दो साल बीतने के बाद भी मंडी में पब्लिक हेल्थ लैब का निर्माण अधूरा

दो साल बीतने पर भी तैयार नहीं हुई आधुनिक प्रयोगशाला मंडी क्षेत्र के भीतर स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और विभिन्न प्रकार की बीमारियों की जांच प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से एक नई पब्लिक हेल्थ लैब स्थापित करने की घोषणा की गई थी। इस परियोजना पर काम शुरू हुए पूरे दो साल का वक्त बीत चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है और भवन तथा आवश्यक उपकरणों का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। निर्माण कार्य की इस लंबी सुस्ती के कारण तय की गई समय सीमा पूरी तरह से फेल हो चुकी है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों के बीच समन्वय की भारी कमी है। इस लैब के चालू हो जाने से आम जनता को स्थानीय स्तर पर ही उच्च स्तरीय चिकित्सा जांच की सुविधाएं मिलनी थीं, लेकिन मौजूदा हालातों को देखकर ऐसा लगता है कि लोगों को अभी और लंबी प्रतीक्षा करनी होगी। निर्माण कार्य में हो रही इस अनवरत देरी के चलते न केवल परियोजना की कुल लागत बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है, बल्कि उन मूल उद्देश्यों को भी झटका लगा है जिनके तहत इस स्वास्थ्य इकाई की नींव रखी गई थी। स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि इतनी महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपयोगिता वाली परियोजना को इतने लंबे समय तक लटकाकर क्यों रखा गया, जबकि स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जानी चाहिए। निर्माण स्थल पर पसरा सन्नाटा और काम की धीमी रफ्तार इस बात की गवाही दे रही है कि प्रशासनिक तंत्र की प्राथमिकता सूची में यह जनहित कार्य फिलहाल काफी पीछे छूट गया है।

स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती के लिए लैब का महत्व और देरी के निहितार्थ किसी भी पहाड़ी या अर्ध-शहरी इलाके में एक आधुनिक पब्लिक हेल्थ लैब का होना चिकित्सा व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि समय पर सटीक जांच रिपोर्ट मिलने से कई गंभीर बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद मिलती है। मंडी जैसे महत्वपूर्ण जिले में इस प्रकार की प्रयोगशाला के निर्माण का मुख्य उद्देश्य यह था कि मरीजों को खून, पानी और अन्य संक्रामक रोगों की जांच के लिए बड़े शहरों या दूर-दराज के निजी अस्पतालों के चक्कर न काटने पड़ें। जब सरकारी स्तर पर ऐसे स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण में दो साल या उससे अधिक का विलंब होता है, तो इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग के उन मरीजों पर पड़ता है जो महंगे निजी परीक्षण कराने में असमर्थ होते हैं। इस तरह की परियोजनाओं के पिछड़ने के पीछे अक्सर बजट आवंटन में देरी, ठेकेदारों की लापरवाही, प्रशासनिक लालफीताशाही और तकनीकी मंजूरियों का समय पर न मिलना मुख्य कारण होते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी अक्सर इन कमियों को दूर करने के दावे करते हैं, लेकिन ज़मीन पर काम की रफ्तार उनके दावों की पोल खोल देती है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए किसी स्वतंत्र उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी विलंब की घटनाएं बार-बार सामने आती रहेंगी। इस पूरी प्रक्रिया में जनता के धन का अपव्यय होने का भी खतरा बना रहता है क्योंकि समय पर काम पूरा न होने से मशीनों और भवनों की शुरुआती लागत और रखरखाव पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। जनता यह उम्मीद करती है कि सरकार स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे से जुड़े ऐसे मामलों में तुरंत संज्ञान लेगी और दोषी एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए काम में तेजी लाएगी।

आगे की राह और जनता में बढ़ती प्रशासनिक नाराजगी पब्लिक हेल्थ लैब के निर्माण में हो रही इस लंबी देरी को लेकर क्षेत्र के नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग में रोष लगातार बढ़ता जा रहा है, और लोग अब स्थानीय प्रशासन से इसके लिए सीधे जवाब की मांग कर रहे हैं। यदि आने वाले कुछ हफ्तों के भीतर इस अधूरे पड़े भवन का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू नहीं किया गया, तो यह मामला तूल पकड़ सकता है और विभिन्न राजनीतिक दलों तथा संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन भी किए जा सकते हैं। जानकारों का कहना है कि प्रशासन को अब बिना किसी देरी के एक निश्चित समय सीमा तय करनी चाहिए जिसके भीतर इस प्रयोगशाला के बचे हुए सभी सिविल और इलेक्ट्रिकल कार्यों को पूरा करके इसे जनता को समर्पित किया जा सके। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े उच्च अधिकारियों को स्वयं मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि वास्तव में किन अड़चनों के कारण पिछले चौबीस महीनों से यह काम रुका हुआ था। जैसे ही यह लैब पूरी तरह बनकर तैयार होगी और इसमें पैथोलॉजी व अन्य जांच उपकरण स्थापित किए जाएंगे, मंडी के स्वास्थ्य मानचित्र पर एक नया मील का पत्थर जुड़ जाएगा। तब तक के लिए, स्थानीय आबादी केवल यही उम्मीद कर सकती है कि संबंधित महकमा अपनी नींद से जागेगा और इस बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य परियोजना को शीघ्र अति शीघ्र धरातल पर उतारने का काम पूरा करेगा, ताकि जनता को राहत की सांस मिल सके।

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