सरकार जनता के द्वार कार्यक्रम में खुली पोल चंबा क्षेत्र के अंतर्गत आयोजित किए जाने वाले विशेष जन संपर्क और लोक कल्याण शिविर जिसका मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना होता है, के दौरान एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। इस महत्वपूर्ण आयोजन के माध्यम से जब स्थानीय ग्रामीण अपनी विभिन्न प्रकार की बुनियादी परेशानियों, शिकायतों और विकास कार्यों से संबंधित मांगों को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों के सामने प्रस्तुत हुए, तब कई विभागों के जिम्मेदार नुमाइंदे अपनी कुर्सियों से गायब मिले। इस प्रकार की गैर-मौजूदगी ने सीधे तौर पर शासन की उस मंशा पर पानी फेरने का काम किया जिसके तहत प्रशासनिक अमले को सीधे जनता की चौखट तक पहुंचकर उनकी कठिनाइयों को दूर करने के निर्देश दिए जाते हैं। जब जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों ने इस शिविर की औचक समीक्षा की और वहां तैनात अमले की उपस्थिति पंजी का मिलान किया, तो कई महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के नदारद मिलने की पुष्टि हुई। इस गंभीर अनुशासनहीनता को उच्च अधिकारियों ने बेहद संजीदगी से लिया और तुरंत प्रभाव से उन सभी गैर-हाजिर कर्मचारियों को कड़े शब्दों में कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया।
प्रशासनिक जवाबदेही और जन शिकायतों का महत्व भारत के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में दूरदराज के इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटना एक लंबी और थका देने वाली प्रक्रिया होती है, जिससे निजात दिलाने के लिए ही ऐसे विशेष जन कल्याण अभियानों की रूपरेखा तैयार की जाती है। इन आयोजनों का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि ग्रामीण जनता को अपने राशन कार्ड, बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य सेवाओं और राजस्व से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए जिला मुख्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही राहत मिल सके। जब ऐसे उच्च प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों में सरकारी सेवक ही अपनी ड्यूटियों से गैर-हाजिर रहने लगें, तो पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगना स्वाभाविक हो जाता है। इस प्रकार की कार्यप्रणाली न केवल प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाती है बल्कि सरकार की उन कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी गंभीर बाधा उत्पन्न करती है जिनका सीधा संबंध आम आदमी के जीवन स्तर को ऊपर उठाने से होता है। शासन स्तर पर इस बात के स्पष्ट निर्देश होते हैं कि जन सुनवाई के इन शिविरों में प्रत्येक संबंधित विभाग के सक्षम अधिकारी की उपस्थिति अनिवार्य हो ताकि मौके पर ही समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
नोटिस के बाद सुधरेगी व्यवस्था और आगे की कार्रवाई कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद से चंबा जिले के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई है, और इस सख्त प्रशासनिक कदम से भविष्य के लिए एक कड़ा संदेश भी गया है। जिन कर्मचारियों को यह नोटिस थमाया गया है, उन्हें एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपना स्पष्टीकरण उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, और संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक रही है। इस घटनाक्रम के बाद से जिला प्रशासन ने भविष्य में आयोजित होने वाले ऐसे सभी जन कल्याण शिविरों की निगरानी और भी अधिक कड़ी करने का निर्णय लिया है, ताकि किसी भी स्तर पर जनता के समय और अधिकारों की अनदेखी न हो सके। स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन के इस कदम का स्वागत किया है और यह उम्मीद जताई है कि इस सख्ती के बाद अब सरकारी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक वफादार और गंभीर बनेंगे। सरकार की यह कोशिश है कि प्रशासनिक अमले में व्याप्त लाचारी और लापरवाही को पूरी तरह से समाप्त किया जाए ताकि आम जनता का शासन प्रणाली पर अटूट विश्वास बना रहे और हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे।