जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में हुआ भयंकर विवाद
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के अंदर स्थित गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब परिसर में एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया था। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष बृजेश कुमार गौतम के द्वारा आधिकारिक रूप से बुलाई गई थी। इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य केंद्रीय मुद्दा लोकतंत्र बचाओ और वोट बचाओ नाम से रखा गया था। इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के तमाम कई वरिष्ठ नेता और विभिन्न पदाधिकारी पूरी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत सामान्य रूप से हो रही थी और सभी नेता अपने निर्धारित स्थान पर मौजूद थे। तभी अचानक कुछ ऐसा हुआ कि वहां का पूरा माहौल पूरी तरह से बदल गया और तनाव पैदा हो गया। बैठने के लिए तय की गई जगहों को लेकर पूर्व जिला अध्यक्ष नगीना साहनी और दूसरे गुट के सदस्यों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। यह आपसी बहस धीरे-धीरे इतनी तेजी से आगे बढ़ी कि बात नियंत्रण से बाहर होने लगी। वहां मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं ने स्थिति को संभालने की कोशिश की लेकिन मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा था। दोनों पक्षों के बीच तू-तू मैं-मैं ने विकराल रूप धारण कर लिया और वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
पूर्व जिला अध्यक्ष के साथ हुई अभद्रता और मारपीट
विवाद बढ़ने के बाद स्थिति इतनी बदतर हो गई कि वहां खुलेआम हाथापाई और थप्पड़ चलाने जैसी घटनाएं सामने आ गईं। आरोप लगाया जा रहा है कि इस पूरे हंगामे के दौरान पूर्व जिला अध्यक्ष नगीना साहनी के साथ भारी अभद्रता की गई। प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आई जानकारियों के अनुसार उन्हें सबके सामने थप्पड़ तक जड़ दिया गया। इस असहज और अप्रत्याशित घटनाक्रम के दौरान वहां प्रेस क्लब में कई पत्रकार भी मौजूद थे। पत्रकारों ने अपने कैमरों में इस पूरे अप्रिय घटनाक्रम को पूरी तरह से रिकॉर्ड कर लिया है। पार्टी के अंदरूनी गुटबाजी और आपसी मतभेद इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खुलकर जनता और मीडिया के सामने आ गए। एक तरफ जहां पार्टी लोकतंत्र की रक्षा करने और वोट बचाने का संदेश देने के लिए मीडिया के सामने आई थी। वहीं दूसरी तरफ उनके अपने ही नेता आपस में कैमरे के सामने उलझते हुए नजर आए। इस शर्मनाक घटना ने समाजवादी पार्टी की स्थानीय इकाई की कार्यशैली और अनुशासनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी के बड़े नेताओं के बीच इस तरह का सार्वजनिक उपद्रव देखकर हर कोई हैरान रह गया। वहां मौजूद किसी भी व्यक्ति ने शायद यह नहीं सोचा था कि एक साधारण प्रेस वार्ता इस हद तक हिंसा में बदल जाएगी।
आपसी कलह और लोकतंत्र बचाओ अभियान की चर्चा
गोरखपुर में हुई इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। जब किसी राजनीतिक दल के जिम्मेदार पदाधिकारी ही सार्वजनिक मंचों पर आपस में भिड़ जाएं तो जनता के बीच गलत संदेश जाता है। लोकतंत्र बचाओ और वोट बचाओ जैसे गंभीर मुद्दों पर बात करने के लिए बुलाई गई इस बैठक का उद्देश्य पूरी तरह से भटक गया। मुद्दों पर बात होने के बजाय पूरा ध्यान नेताओं के बीच हुई मारपीट और थप्पड़ कांड पर केंद्रित हो गया। इस तरह की घटनाएं राजनीतिक दलों के जमीनी स्तर के संगठन में मौजूद आपसी फूट को उजागर करती हैं। पूर्व जिला अध्यक्ष और दूसरे गुट के बीच हुआ यह झगड़ा पार्टी के लिए आने वाले समय में मुश्किलें खड़ी कर सकता है। हालांकि इस पूरे मामले पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कैमरों में कैद हुई यह फुटेज आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक भूचाल ला सकती है। जिला स्तर पर पार्टी संगठन को अब इस प्रकार की अनुशासनहीनता पर कड़े कदम उठाने की आवश्यकता महसूस हो रही है। इस प्रकार की झड़पें न केवल राजनीतिक नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी गिराती हैं।