रायसेन में पुतला दहन के दौरान हादसा
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के सिलवानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में प्रदर्शन के दौरान एक कांग्रेस कार्यकर्ता बुरी तरह झुलस गया। कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और एसआईआर के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। पुतला जलाने की प्रक्रिया के दौरान आग अनियंत्रित होकर भड़क गई और कार्यकर्ता के सिर व कपड़ों तक पहुंच गई। गनीमत यह रही कि कार्यकर्ता समय रहते वहां से सुरक्षित भागने में सफल रहा और आसपास के लोगों ने आग को नियंत्रित कर लिया। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आग की लपटों से घिरे कार्यकर्ता को घबराकर भागते हुए देखा जा सकता है। यह घटना स्पष्ट करती है कि राजनीतिक विरोध के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी घातक हो सकती है। कार्यकर्ता जोश में थे लेकिन आग के साथ सावधानी न रखने के कारण यह प्रदर्शन एक बड़े हादसे का रूप लेते-लेते बचा। लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सबको है, लेकिन जान जोखिम में डालकर प्रदर्शन करना किसी भी स्तर पर उचित नहीं माना जा सकता है।
ग्वालियर में सेवा ज्योति यात्रा में आग
ग्वालियर में आयोजित भाजपा की सेवा ज्योति यात्रा के दौरान मशाल की आग ने एक कार्यकर्ता को अपनी चपेट में ले लिया। घटना तब हुई जब ग्वालियर सांसद भरत सिंह कुशवाह मशाल लेकर यात्रा में शामिल थे। एक उत्साही कार्यकर्ता उस मशाल को यात्रा रथ पर स्थापित करने के लिए ऊपर चढ़ा था। जैसे ही उसे मशाल थमाई जा रही थी, उसकी लौ कार्यकर्ता के कपड़ों के संपर्क में आ गई। देखते ही देखते आग ने उसकी शर्ट पकड़ ली और स्थिति बिगड़ने लगी। वहां मौजूद पार्टी के अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने तुरंत सतर्कता दिखाई और स्थिति को संभाला। कार्यकर्ता ने खुद भी सूझबूझ दिखाते हुए आग को बुझाया और सावधानी से रथ के नीचे उतर आया। इस पूरी घटना के दौरान सांसद भरत सिंह कुशवाह भी आग की लपटों की जद में आने से बाल-बाल बचे। यह घटना साबित करती है कि राजनीतिक रैलियों और धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा का ध्यान रखना अनिवार्य है, वरना एक छोटी सी चूक बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
मुख्यमंत्री की बयानबाजी और प्रशासनिक बैठक
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी हालिया टिप्पणियों और बैठकों के कारण चर्चाओं में बने हुए हैं। रतलाम में आयोजित बलराम महोत्सव के दौरान, उन्होंने मंच से मंत्री चैतन्य काश्यप को सेठ जी कहकर संबोधित किया, जो स्थानीय राजनीति में आकर्षण का केंद्र बन गया। साथ ही, उन्होंने रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर को गलती से पूर्व विधायक बता दिया, जिसके चलते उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। इसी कार्यक्रम में महापौर प्रहलाद पटेल की अनुपस्थिति पर उन्होंने तंज कसते हुए मैरिज गार्डन और नगर निगम के काम को लेकर टिप्पणी की। दूसरी ओर, शासन की एक उच्च स्तरीय बैठक में शत्रु संपत्ति के मामले पर एक प्रमुख सचिव तैयारी के अभाव में घिर गए। जब जानकारी उपलब्ध कराने में असमर्थता हुई तो उन्होंने सारा दोष एक एसीएस पर डाल दिया, लेकिन एसीएस ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया। अंततः एक वरिष्ठ अधिकारी ने हस्तक्षेप कर प्रमुख सचिव को फजीहत से बचाया। इसके अलावा, कैलाश विजयवर्गीय ने भी सार्वजनिक रूप से पूर्व मंत्री कमल पटेल के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया है।