कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
PM बोले-कुछ लोग विदेशों में भारत को बदनाम कर रहे: कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश क...      मुझे गालियां पड़ेंगी, लेकिन...; योगेंद्र यादव ने कहा- अभी मोदी का इस्तीफा नहीं चाहते लोग      अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का जामनगर जाना क्या भारत की अहमियत बताता है?      फ़्रांस के राष्ट्रपति विदेशी नेताओं पर भड़के, 'इस्लामी और प्रवासी भीड़' के आरोप पर दिया जवाब      सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो हैं अनसुलझे      ‘CJP प्रोटेस्ट के लिए फंडिंग कहां से आती है?’ RSS के Indresh Kumar ने उठाए सवाल      Tiger Shroff Attack Case में बड़ा खुलासा, वारदात से पहले शूटरों ने की थी बंदूक चलाने की प्रैक्टिस, हुआ था म      दिल्ली में AAP और कांग्रेस की पार्षद भिड़ीं, MCD सदन में खींचतान के बाद आई हाथापाई की नौबत     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
लोकल

साहित्य लोकार्पण: सारनाथ में इंदीवर के उपन्यास देववंशज का विमोचन

सारनाथ के एक प्रमुख शिक्षण संस्थान में साहित्यकार इंदीवर की नई पुस्तक का विमोचन किया गया। इस दौरान देश की प्राचीन संस्कृति और पौराणिक कथाओं पर विद्वानों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग और विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित रहे।

A
Ankit Yadav
20 अक्ट 2026, 13:18
साहित्य लोकार्पण: सारनाथ में इंदीवर के उपन्यास देववंशज का विमोचन

पुस्तक लोकार्पण समारोह का आयोजन

भारतीय संस्कृति और प्राचीन परंपराओं के विकास पर आधारित एक साहित्यिक कृति का रविवार को सार्वजनिक रूप से अनावरण किया गया। यह कार्यक्रम सारनाथ के भीतर स्थित उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के बड़े सभागार में संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर लेखक इंदीवर द्वारा रचित उपन्यास देववंशज को पाठकों के सामने लाया गया। पुस्तक के आने के बाद संस्थान के परिसर में एक परिसंवाद का भी आयोजन किया गया जिसमें तमाम बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से हुई जिसे तिब्बती संस्थान की कुलसचिव डॉ। सुनीता चंद्रा ने प्रस्तुत किया। इसके बाद पूरे आयोजन की रूपरेखा और संचालन नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने संभाली। अंत में कार्यक्रम के समापन पर सभी का आभार जताने का कार्य डॉ। उमेश प्रसाद सिंह ने किया। इस साहित्यिक आयोजन में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ। दयाशंकर मिश्र दयालु ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अलावा वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी और विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह ने भी इस गरिमामयी समारोह की शोभा बढ़ाई। वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा के साथ ही डॉ। दयानिधि मिश्र, नरेंद्रनाथ मिश्र और हिमांशु उपाध्याय जैसे प्रबुद्ध नागरिक भी इस पुस्तक लोकार्पण के दौरान मंच और सभागार में प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

विद्वानों द्वारा उपन्यास पर चर्चा

उपन्यास के विमोचन के तुरंत बाद इस पर एक विस्तृत बौद्धिक चर्चा की शुरुआत की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे असोम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य ने अपने संबोधन में बताया कि यह कृति प्राचीन वेदों और पुराणों की कथाओं के सहारे देश की साझा संस्कृति का परिचय देती है। उन्होंने आगे कहा कि यह रचना राष्ट्रीय एकता और सबकी सहभागिता का मजबूत संदेश समाज तक पहुंचाती है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजित कुमार चतुर्वेदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि लेखक ने रचना के भीतर कई दार्शनिक प्रश्नों को उठाया है। उनके अनुसार आर्य और द्रविड़ के बीच के संवाद के अलावा देव और असुर की श्रेष्ठता जैसे विषयों को भी इसमें शामिल किया गया है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रोफेसर आनंद कुमार त्यागी ने बताया कि यह पुस्तक आम जनता के लिए तैयार की गई है जो पाठकों को चिंतनशील बनाती है। तिब्बती संस्थान के कुलपति प्रोफेसर वांगचुक दोर्जी नेगी ने इस बात पर जोर दिया कि यह रचना महात्मा बुद्ध के काल से भी बहुत पहले के इतिहास को उजागर करती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पुरातत्व से मिलने वाले अवशेषों और पुराणों के अध्ययन को एक साथ जोड़कर व्यापक शोध किया जाना चाहिए। इस चर्चा के दौरान बलिराज पांडेय, प्रोफेसर ओमप्रकाश सिंह और प्रोफेसर सुरेंद्र प्रताप ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार सबके सामने रखे और उपन्यास की खूबियों पर प्रकाश डाला।

लेखक की दृष्टि और सांस्कृतिक महत्व

अपनी इस नई कृति के बारे में विस्तार से बात करते हुए लेखक डॉ। इंदीवर ने बताया कि उनकी यह कहानी मुख्य रूप से चार विशेष चरित्रों के इर्द-गिर्द घूमती है। इन प्रमुख चरित्रों में इंद्र, पृथु, दक्ष और मनु शामिल हैं जिनके माध्यम से पूरी कथा को गढ़ा गया है। उन्होंने बताया कि उस प्राचीन काल में देवता पृथ्वी पर ही निवास करते थे और उनका मुख्य भोजन नीवार, चावल तथा जौ हुआ करता था। वे लोग प्राकृतिक वातावरण में झोपड़ों के भीतर रहते थे और पर्वतीय क्षेत्रों में विचरण करते थे जबकि असुर तकनीक के मामले में काफी आगे थे। उस समय गंधर्वों, किन्नरों और नागों के साथ भी गहरे सौहार्दपूर्ण संबंध हुआ करते थे जो इस कथा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लेखक ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रलय जैसी बड़ी आपदा आने के बाद भी हमारी यह प्राचीन परंपरा नष्ट नहीं हुई बल्कि जीवित बची रही। ईसा मसीह के जन्म से लगभग 6 हजार वर्ष पूर्व की सभ्यताओं के बीच आपसी मेलजोल को इस उपन्यास का मुख्य जीवन दर्शन बताया गया है। इस प्रकार यह पूरी रचना प्राचीन इतिहास, मिथकों और मानवीय सभ्यता के विकास क्रम को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ने का एक अनूठा और सार्थक प्रयास साबित होती है जो आने वाले समय में पाठकों को गहराई से प्रभावित करेगी।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज