नेई-नेटी स्कूल में लोक नृत्य का प्रशिक्षण
सिरमौर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नेई-नेटी स्कूल में हाल ही में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधि का आयोजन संपन्न हुआ। इस विशेष कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और पारंपरिक लोक नृत्य के गुर सीखे। इस दौरान स्थानीय संस्कृति से जुड़े विभिन्न नृत्य रूपों की मूल विशेषताओं और चरणों का अभ्यास कराया गया। छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों के मार्गदर्शन में नृत्य की हर बारीकी को समझने का प्रयास किया। इस प्रकार की गतिविधियों से विद्यालय परिसर में एक सकारात्मक और ऊर्जावान माहौल देखने को मिला। बच्चों ने पारंपरिक संगीत की धुनों पर थिरकते हुए नृत्य की कला को आत्मसात किया। इस आयोजन का मुख्य केंद्र बिंदु विद्यार्थियों को अपनी क्षेत्रीय संस्कृति से सीधे तौर पर जोड़ना था ताकि वे अपनी प्राचीन परंपराओं को भली-भांति जान सकें। विद्यालय के इस कदम की सराहना आसपास के क्षेत्रों में भी की जा रही है क्योंकि इससे बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है। पढ़ाई के साथ-साथ इस तरह की सांस्कृतिक गतिविधियां विद्यार्थियों के मानसिक विकास और आत्मविश्वास को बढ़ाने में भी बहुत मददगार साबित होती हैं।
पारंपरिक कलाओं को सीखने में जुटे छात्र
नेई-नेटी स्कूल में आयोजित इस विशेष सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने लोक नृत्य की विभिन्न शैलियों और उनकी तकनीकों का गहन अध्ययन किया। प्रशिक्षकों ने बच्चों को पारंपरिक वेशभूषा और लयबद्ध ताल के साथ नृत्य करने के सही तौर-तरीकों से अवगत कराया। छात्र-छात्राओं ने बड़े ध्यान से एक-एक मुद्रा को सीखा और उसका अभ्यास किया। इस दौरान विद्यालय के अन्य शिक्षकों और प्रबंधकों ने भी बच्चों का उत्साहवर्धन किया ताकि वे पूरी ऊर्जा के साथ इस कला में भाग लें। लोक नृत्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि हमारी ऐतिहासिक पहचान का एक अहम हिस्सा होते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए बच्चों को प्राचीन शैलियों के ऐतिहासिक महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने पारंपरिक कदमों और हाथों की मुद्राओं का तालमेल बिठाना सीखा जो किसी भी लोक नृत्य की बुनियादी जरूरत होती है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों के भीतर अपनी सांस्कृतिक धरोहर के प्रति एक नया सम्मान और जिज्ञासा पैदा हुई है। इस तरह के आयोजनों से ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में छिपी हुई प्रतिभाओं को भी एक बेहतर मंच मिलने की उम्मीद बंधती है। सभी बच्चों ने सामूहिक रूप से अभ्यास किया जिससे उनके बीच आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना भी मजबूत हुई।
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और महत्व
आधुनिक युग में पश्चिमी प्रभावों के बीच अपनी पारंपरिक लोक कलाओं को सहेजे रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सिरमौर के नेई-नेटी स्कूल जैसी शिक्षण संस्थाएं जब इस प्रकार के सांस्कृतिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती हैं तो यह विरासत संरक्षण की दिशा में एक ठोस कदम बन जाता है। इस प्रकार की पहल से यह सुनिश्चित होता है कि आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहें और उन्हें भूले नहीं। लोक नृत्य हमारे समाज के रीति-रिवाजों, उत्सवों और ऐतिहासिक गाथाओं को जीवित रखने का एक सशक्त माध्यम माने जाते हैं। जब विद्यार्थी कम उम्र में ही इन कलाओं से परिचित हो जाते हैं तो उनका सांस्कृतिक आधार मजबूत होता है। शिक्षाविदों का मानना है कि पाठ्यक्रम के साथ-साथ सांस्कृतिक शिक्षा भी बच्चों के संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण के लिए अनिवार्य है। इस आयोजन के सफल होने के बाद विद्यालय प्रशासन भविष्य में भी इस तरह के और अधिक कार्यक्रम आयोजित करने पर विचार कर रहा है। स्थानीय अभिभावकों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे बच्चों का ध्यान रचनात्मक कार्यों की ओर आकर्षित होता है। क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे प्रयास मील का पत्थर साबित होते हैं और समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं।