करोड़ों रुपए की वित्तीय स्वीकृति
हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ककरघटा-मिठनापुर-शर्मा संपर्क मार्ग पर एक नया पुल और एप्रोच मार्ग बनाया जाएगा। इस महत्वपूर्ण निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए सरकार की तरफ से चौदह करोड़ सैंतीस लाख चौरासी हजार रुपए की कुल धनराशि की स्वीकृति दे दी गई है। यह वित्तीय मंजूरी आठ अक्टूबर की देर शाम को सामने आई थी जिसके बाद इलाके के लोगों ने इसकी जानकारी साझा की। लंबे समय से इस क्षेत्र में आवागमन को लेकर गंभीर समस्या बनी हुई थी और ग्रामीण लगातार बेहतर रास्ते की मांग कर रहे थे। इस नई स्वीकृत राशि के मिलने से अब उस इलाके में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। स्थानीय नागरिकों और क्षेत्रवासियों ने इस सौगात के मिलने के बाद उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रति अपना गहरा आभार व्यक्त किया है। इस पुल और संपर्क मार्ग के बन जाने से उस क्षेत्र की भौगोलिक और आवागमन से जुड़ी बड़ी बाधा हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।
दर्जनों गांवों को मिलेगा सीधा फायदा
इस संपर्क मार्ग के माध्यम से रोजाना ककरघटा, मिठनापुर, शर्मा, बिलालपुर, खरगपुर और झरसा समेत कई आसपास के गांवों के लोग आवाजाही करते हैं। स्वीकृत की गई इस धनराशि से न केवल एक मजबूत पुल का निर्माण होगा बल्कि उसके दोनों सिरों पर एप्रोच मार्ग भी तैयार किए जाएंगे। इसके बन जाने से आसपास के इन सभी गांवों के निवासियों को अपने नजदीकी मुख्य मार्गों तक पहुंचने में भारी सुविधा मिलने की पूरी उम्मीद है। ग्रामीणों का ऐसा कहना है कि जब इस पूरी परियोजना का निर्माण कार्य पूरी तरह से संपन्न हो जाएगा, तब बरसात और बाढ़ के मौसम के दौरान आवागमन पूरी तरह से बाधित होने की पुरानी समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी। लोगों को अब पानी भरने के कारण दूसरे लंबे और कठिन रास्तों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। इस प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने से शाहाबाद क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर में बड़ा सकारात्मक बदलाव आएगा और लोगों का सफर काफी ज्यादा आसान तथा सुरक्षित हो जाएगा।
छात्र और किसानों को बड़ी राहत
इस रास्ते के खराब होने या जलभराव की चपेट में आने से सबसे ज्यादा परेशानी छात्र-छात्राओं और स्थानीय किसानों को उठानी पड़ती थी। बरसात के दिनों में रास्तों पर पानी भर जाने और बाढ़ जैसी विकट स्थिति बन जाने के कारण स्कूल तथा कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों का निकलना लगभग असंभव हो जाता था। इसके अलावा क्षेत्र के किसानों को अपनी मेहनत से उगाई गई फसल तथा अन्य कृषि संबंधी जरूरी सामानों को बाजार तक ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। बीमार मरीजों और उनके तीमारदारों को भी आपातकालीन समय में अस्पताल या अन्य स्थानों पर पहुंचने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था। इन सभी गंभीर समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ही इस संपर्क मार्ग और पुल के निर्माण को बेहद जरूरी माना गया था। अब इस निर्माण कार्य के पूरा होने के बाद विद्यार्थियों की शिक्षा प्राप्ति का मार्ग सुगम होगा, किसानों का व्यापार बेहतर होगा और आपातकाल में स्वास्थ्य सेवाएं भी आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।