चलती मोटरसाइकिल पर अचानक गिरा सूखे पेड़ का बड़ा हिस्सा सड़क पर रफ्तार से आगे बढ़ रही एक मोटरसाइकिल पर अचानक एक पुराने सूखे पेड़ की भारी टहनी आ गिरी जिससे वाहन पर सवार एक चालीस वर्षीय व्यक्ति की मौके पर ही जान चली गई और उसके साथ मौजूद पत्नी तथा एक छोटा बच्चा गंभीर रूप से जख्मी हो गए। यह भयानक दुर्घटना उस समय हुई जब परिवार किसी जरूरी काम से अपने दोपहिया वाहन पर सवार होकर जा रहा था और रास्ते में बिना किसी पूर्व चेतावनी के सड़क किनारे खड़ा पुराना सूखा पेड़ अचानक टूटकर उनकी बाइक के ठीक ऊपर आ गिरा। इस अप्रत्याशित और भीषण प्रहार के कारण मोटरसाइकिल चालक को संभलने का बिल्कुल भी मौका नहीं मिला और वह वाहन सहित सड़क पर जा गिरा। स्थानीय राहगीरों और आसपास के दुकानदारों ने जब यह हृदयविदारक मंजर देखा तो वे तुरंत मदद के लिए दौड़े और पुलिस तथा एम्बुलेंस सेवा को इस दुर्घटना की त्वरित सूचना दी। घायलों को तुरंत खून से लथपथ हालत में वाहन से बाहर निकाला गया और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद चालीस वर्षीय युवक को मृत घोषित कर दिया जबकि उसकी पत्नी और बच्चे की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें विशेष चिकित्सा देखभाल के लिए बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया गया।
शहरी इलाकों और सड़कों के किनारे सूखे पेड़ों का बढ़ता खतरा इस प्रकार की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं अक्सर इस बात की ओर गंभीर इशारा करती हैं कि सार्वजनिक मार्गों और गलियों के किनारे खड़े मृत या सूखे पेड़ों की समय पर कटाई और छंटाई न होना आम नागरिकों की जान के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है। देश के तमाम छोटे और बड़े शहरों तथा ग्रामीण अंचलों में भी कई ऐसे पुराने पेड़ मौजूद हैं जिनकी जड़ें कमजोर हो चुकी हैं या जिनकी शाखाएं सूखकर कभी भी नीचे गिरने की स्थिति में रहती हैं लेकिन संबंधित विभागों की उदासीनता के कारण इनकी नियमित निगरानी नहीं हो पाती है। नगर निकायों और वन विभागों के बीच कई बार आपसी समन्वय की कमी के चलते खतरनाक पेड़ों को हटाने का कार्य समय पर पूरा नहीं हो पाता है जिसका खामियाजा आए दिन बेकसूर राहों पर चलने वाले आम जनता को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ता है। खासकर मानसून के मौसम या तेज आंधी-तूफान के दौरान इस तरह के सूखे पेड़ों के गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है जो सड़क पर पैदल चलने वालों या दोपहिया वाहन चालकों के लिए मौत का फंदा साबित होते हैं। स्थानीय निवासियों और नागरिकों द्वारा समय-समय पर प्रशासनिक अधिकारियों को इन जर्जर और सूखे पेड़ों की मौजूदगी के बारे में अवगत कराया जाता है ताकि किसी बड़े हादसे से पहले उचित कदम उठाए जा सकें लेकिन ज्यादातर मामलों में औपचारिकताएं पूरी होने से पहले ही ऐसी त्रासदियां घटित हो जाती हैं।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल और मुआवजे की मांग इस दुखद हादसे के बाद से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने संबंधित प्रशासनिक विभागों की कार्यप्रणाली तथा लापरवाही पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क किनारे खड़े इस सूखे पेड़ को छांट दिया जाता या पूरी तरह से हटा दिया जाता तो शायद एक हंसता-खेलता परिवार इस तरह की बड़ी विपत्ति का शिकार होने से बच जाता। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और मृतक के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया जा सके। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस इलाके में ऐसे अन्य खतरनाक और सूखे पेड़ भी मौजूद हैं जो किसी अन्य यात्री के लिए खतरा बन सकते हैं ताकि नगर निगम के सहयोग से उन्हें तुरंत प्रभाव से हटवाया जा सके। पीड़ित परिवार के रिश्तेदारों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इस असहनीय दुख की घड़ी में सरकार और स्थानीय प्रशासन को प्रभावित परिवार को उचित आर्थिक सहायता और गंभीर रूप से घायल मां-बच्चे के इलाज का पूरा खर्च वहन करना चाहिए ताकि उन्हें इस कठिन परिस्थिति से उबरने में कुछ मदद मिल सके।